एलारा कैपिटल के एमडी और सीईओ हरेंद्र कुमार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए टैक्स कटौती की मांग को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नहीं, बल्कि हेज फंड्स और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की है।
- एलारा कैपिटल के सीईओ ने FIIs के लिए टैक्स कटौती का विरोध किया।
- दावा किया गया कि केवल हेज फंड और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स ही टैक्स की शिकायत कर रहे हैं।
- निफ्टी के अगले 15 महीनों में 28,000 अंक तक पहुंचने की संभावना।
- FIIs द्वारा पिछले दो वर्षों में भारी पूंजी की निकासी दर्ज।
मुंबई में आयोजित 'अश्वमेध' वार्षिक कॉन्क्लेव के दौरान, एलारा कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हरेंद्र कुमार ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारतीय शेयर बाजार में घटते रिटर्न के आधार पर टैक्स नीति में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए टैक्स में कटौती की मांग करना वास्तव में सरकार से उनके 'अंडर-परफॉरमेंस' (खराब प्रदर्शन) को फंड करने के लिए कहना है।
श्री कुमार ने सवाल उठाया कि जब दो साल पहले विदेशी निवेशक भारत में भारी मुनाफा कमा रहे थे, तब उन्होंने टैक्स कटौती की मांग क्यों नहीं की? उनके अनुसार, FIIs को मुद्रा मूल्यह्रास और लागत के बाद भी लाभ कमाना चाहिए, और वर्तमान शिकायतें केवल उन समूहों से आ रही हैं जो अल्पकालिक लाभ के लिए सट्टा लगाते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बहस भारत की राजकोषीय नीति और विदेशी पूंजी के बीच के तनाव को दर्शाती है। जबकि कुछ ब्रोकर एसोसिएशन जैसे ANMI, रिटेल भागीदारी बढ़ाने के लिए STT (प्रतिभूति लेनदेन कर) और LTCG (दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर) में कटौती की वकालत कर रहे हैं, एलारा कैपिटल जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की अस्थिरता के लिए टैक्स संरचना जिम्मेदार नहीं है।
"FIIs के लिए टैक्स कटौती की मांग करना सरकार से उनके खराब प्रदर्शन की भरपाई करने के लिए कहना है।"
वर्तमान में, डिलीवरी पर STT 0.1% और इंट्राडे ट्रेड के लिए 0.025% है। वहीं, 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए निवेश पर 1.25 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर 12.5% LTCG लगाया जाता है। कुमार का मानना है कि घरेलू निवेशकों के लिए भी ये दरें प्रतिस्पर्धी हैं और इनमें बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी अभी भी बरकरार है। उन्होंने वॉटर ट्रीटमेंट, पावर और ईवी ऑटो एंसिलरी को प्रमुख इक्विटी थीम बताया, जो आने वाले समय में FIIs और DIIs दोनों को आकर्षित करेंगे।
| टैक्स प्रकार | वर्तमान दर | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| STT (डिलीवरी) | 0.1% | सभी इक्विटी निवेशक |
| STT (इंट्राडे) | 0.025% | डे ट्रेडर्स |
| LTCG | 12.5% (>1.25 लाख) | दीर्घकालिक निवेशक |
डेटा के अनुसार, सितंबर 2026 तक चालू कैलेंडर वर्ष में FIIs द्वारा लगभग ₹2.2 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी (Net Outflow) दर्ज की गई है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पूंजी निकाली है, जबकि निफ्टी 50 में पिछले साल 2.5% की गिरावट देखी गई।
Frequently Asked Questions
1. LTCG क्या है और यह कैसे काम करता है?
LTCG का मतलब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स है। भारत में, यदि आप इक्विटी को एक वर्ष से अधिक समय तक रखते हैं, तो 1.25 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर 12.5% टैक्स लगता है।
2. FIIs के बाहर निकलने का मुख्य कारण क्या है?
विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, मुद्रा मूल्यह्रास और भारतीय बाजार में मूल्यांकन (Valuations) का उच्च होना प्रमुख कारण माने जाते हैं।