तिरुपति जिला कलेक्टर ने अल नीनो के कारण कम बारिश की चेतावनी देते हुए सुल्लुरपेटा और नायडुपेटा के किसानों को धान की खेती न करने की सलाह दी है। पानी की कमी को देखते हुए वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया है।

  • अल नीनो के कारण इस वर्ष वर्षा में 32% की कमी का अनुमान है।
  • सुल्लुरपेटा और नायडुपेटा के किसानों को धान की खेती से बचने की सलाह दी गई है।
  • तेलुगु गंगा नहर में केवल 10-12 TMC पानी उपलब्ध है।
  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्री-मानसून ड्राई सोइंग (PMDS) तकनीक का सुझाव दिया गया है।

तिरुपति जिले के सुल्लुरपेटा और नायडुपेटा क्षेत्रों में कृषि संकट की आहट सुनाई दे रही है। तिरुपति जिला कलेक्टर एस. वेंकटेश्वर ने किसानों को आगाह किया है कि वे आगामी महीनों में होने वाली कम बारिश और अल नीनो (El Nino) के संभावित प्रभाव को देखते हुए धान की खेती करने से बचें। यह चेतावनी उस समय आई है जब अक्टूबर में बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों का एक बड़ा वर्ग नई फसल की योजना बना रहा है।

बुधवार को नायडुपेटा के ALCM स्कूल मैदान में आयोजित 'एग्री एक्सपो और किसान मेला' के उद्घाटन के दौरान कलेक्टर ने कृषि परिदृश्य पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि आमतौर पर जिले में लगभग 32,000 हेक्टेयर में कृषि कार्य किया जाता है, लेकिन भूजल स्तर में वृद्धि और कंदलेरू जलाशय के भरने के कारण इस वर्ष यह बढ़कर 52,000 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। हालांकि, यह वृद्धि अस्थायी हो सकती है क्योंकि मौसम विभाग ने इस वर्ष वर्षा में 32% की भारी कमी का अनुमान लगाया है।

क्यों है यह चिंता का विषय?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव न केवल मानसून के पैटर्न को बदलता है, बल्कि सिंचाई के स्रोतों पर भी अत्यधिक दबाव डालता है। कलेक्टर वेंकटेश्वर ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों की पहचान की है जहाँ सिंचाई के निश्चित स्रोत नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तेलुगु गंगा नहर में केवल 10-12 TMC पानी उपलब्ध है, जो इतनी बड़ी आबादी की धान की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

अल नीनो के कारण होने वाली वर्षा की कमी किसानों के लिए एक गंभीर आर्थिक जोखिम पैदा कर सकती है, यदि वे जल-गहन फसलों पर निर्भर रहते हैं।

सुल्लुरपेटा की विधायक नेलावा विजयाश्री ने किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने खेती में ड्रोन का उपयोग, उन्नत मशीनीकरण और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए नियमित मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) करने की सलाह दी। इससे न केवल लागत कम होगी बल्कि संसाधनों का कुशल प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा।

वैकल्पिक समाधान: PMDS तकनीक

कृषि विभाग के अधिकारियों ने 'प्री-मानसून ड्राई सोइंग' (PMDS) के महत्व पर प्रकाश डाला। इस पद्धति में अनाज, दलहन और तिलहन के बीजों का मिश्रण बोया जाता है, जो न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखता है बल्कि कम पानी में भी बेहतर परिणाम देता है।

क्या आप जानते हैं?: अल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के सतही तापमान में वृद्धि करती है, जिससे पूरी दुनिया में मानसून का चक्र प्रभावित होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कलेक्टर ने धान की खेती से बचने के लिए क्यों कहा?
उत्तर: अल नीनो के कारण वर्षा में 32% की कमी का अनुमान है और सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी सीमित है।

प्रश्न 2: किसानों के लिए क्या विकल्प सुझाए गए हैं?
उत्तर: किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रोन तकनीक और प्री-मानसून ड्राई सोइंग (PMDS) अपनाने की सलाह दी गई है।