संबद्ध किसान संगठनों के नेतृत्व में किसानों ने मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर अपना सात दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। उनकी प्रमुख मांगों में एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी शामिल है।

  • समान्य किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में 32 किसान संगठनों ने प्रदर्शन शुरू किया।
  • प्रमुख मांगें: सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत MSP और पूर्ण कर्ज माफी।
  • प्रदर्शन मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर के सेक्टर 48-49 एयरपोर्ट रोड पर जारी है।
  • किसान धान की खेती छोड़ने के लिए वैकल्पिक फसलों की खरीद की गारंटी मांग रहे हैं।

सितंबर की शुरुआत के साथ ही मोहाली-चंडीगढ़ मार्ग पर तनाव और हलचल बढ़ गई है। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सात दिवसीय धरना शुरू कर दिया है, जहाँ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अस्थायी आश्रयों में बदल दिया गया है और सड़कों के किनारे सामुदायिक रसोई (लंगर) स्थापित की गई हैं। यह प्रदर्शन समान्य किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें 32 विभिन्न किसान संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र चंडीगढ़ के एयरपोर्ट रोड पर सेक्टर 48-49 के पास आवंटित स्थल है। किसान नेता बलबीर सिंह राजवाल और अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में, किसान अपनी मांगों को लेकर दृढ़ हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कानूनी गारंटी चाहते हैं।

प्रमुख मांगें और आर्थिक संकट

किसानों की मांगों की सूची काफी विस्तृत है। इनमें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पूर्ण ऋण माफी, और गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, किसान बिजली बिल 2025 और बीज बिल 2025 को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि जब तक सरकार वैकल्पिक फसलों की खरीद की गारंटी नहीं देती, तब तक धान की खेती से हटकर जल संरक्षण की ओर बढ़ना मुश्किल होगा।

पर्यावरण और जल संकट का मुद्दा

BKU (डाकोंदा) के नेता बूटा सिंह बुर्जगिल ने पंजाब में बढ़ते भूजल संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार को नहरों के बुनियादी ढांचे की मरम्मत करनी चाहिए ताकि पानी खेतों तक पूरी क्षमता से पहुँच सके। वहीं, BKU (राजवाल) के नेता परमदीप सिंह बैदवान ने सुझाव दिया कि यदि सरकार बासमती, आलू, मक्का और दालों जैसी वैकल्पिक फसलों की MSP पर खरीद सुनिश्चित करती है, तो किसान स्वेच्छा से धान की खेती छोड़ सकते हैं।

BozokMedia विश्लेषण: राजनीतिक गतिरोध

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह आंदोलन केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब के जल अधिकारों और संघीय ढांचे से भी जुड़ा है। किसान संगठन पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं ताकि राज्य के नदी जल समझौतों की समीक्षा की जा सके और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में पंजाब का प्रतिनिधित्व बहाल किया जा सके।

Did You Know?: पंजाब भारत की 'खाद्य टोकरी' माना जाता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: किसानों का यह आंदोलन कितने दिनों तक चलेगा?
उत्तर: यह धरना वर्तमान में 1 सितंबर से 7 सितंबर तक, सात दिनों के लिए निर्धारित किया गया है।

प्रश्न 2: प्रदर्शन के कारण यातायात पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: मोहाली पुलिस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे प्रदर्शन मार्ग से बचें और वैकल्पिक सड़कों का उपयोग करें।