मुंबई की एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, सृष्टि शारदा ने कार्यस्थल पर होने वाले शोषण के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसमें सहकर्मी के जाने के बाद सारा काम बाकी टीम पर डाल दिया जाता है।
- सहकर्मी के इस्तीफे के बाद अक्सर नई भर्ती के बजाय काम मौजूदा कर्मचारियों में बांट दिया जाता है।
- बिना वेतन वृद्धि या पदोन्नति के अतिरिक्त जिम्मेदारी लेना कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल को प्रभावित करता है।
- सोशल मीडिया पर सृष्टि शारदा का वीडियो कॉर्पोरेट जगत की इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर रहा है।
मुंबई की एक प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सृष्टि शारदा का एक हालिया वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में उन्होंने कॉर्पोरेट जगत की एक ऐसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया है, जिससे करोड़ों कर्मचारी हर दिन जूझते हैं: जब कोई सहकर्मी इस्तीफा देता है, तो उसका काम खत्म नहीं होता, बल्कि वह चुपचाप बाकी बचे हुए कर्मचारियों के कंधों पर आ जाता है।
सृष्टि शारदा ने अपने वीडियो में सीधे तौर पर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कैसा ट्रेंड है जहाँ किसी कर्मचारी के जाने के बाद कंपनी उसकी जगह नया व्यक्ति रखने के बजाय, उस खाली पद को भरने के बजाय काम को मौजूदा टीम के बीच बांट देती है। उन्होंने इसे कर्मचारियों का स्पष्ट शोषण करार दिया है।
कार्यस्थल पर बढ़ता दबाव और वेतन का असंतुलन
शारदा के अनुसार, समस्या केवल अतिरिक्त कार्यभार उठाने की नहीं है, बल्कि समस्या उस 'अदृश्य' बोझ की है जिसके लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, "यह ऐसा नहीं है कि बदले में आपको कोई अतिरिक्त सहायता मिलती है। न वेतन में वृद्धि, न सराहना, न पदोन्नति, कुछ भी नहीं।"
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति न केवल उत्पादकता को कम करती है, बल्कि कर्मचारियों में 'बर्नआउट' (Burnout) की स्थिति भी पैदा करती है। जब कर्मचारी देखते हैं कि अधिक काम करने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति या पद में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो वे कंपनी के प्रति अपनी निष्ठा खोने लगते हैं।
कॉर्पोरेट जगत में 'वर्कलोड रीडिस्ट्रीब्यूशन' अक्सर दक्षता बढ़ाने के नाम पर कर्मचारियों के शोषण का एक उपकरण बन जाता है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे 'बिना वेतन वृद्धि के अधिक काम' (More work, same salary) का नाम दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां इस असंतुलन को नहीं सुधारती हैं, तो वे अपनी सबसे कुशल प्रतिभाओं को खो सकती हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: कॉर्पोरेट संस्कृति का विकास
ऐतिहासिक रूप से, कार्यस्थल पर 'मल्टी-टास्किंग' को एक कौशल माना जाता था, लेकिन आधुनिक कॉर्पोरेट युग में, यह अक्सर बिना किसी अतिरिक्त लाभ के काम के बोझ को बढ़ाने का एक तरीका बन गया है। 'क्वाइट क्विटिंग' (Quiet Quitting) जैसे शब्द इसी असंतुलन का परिणाम हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सृष्टि शारदा का वीडियो किस बारे में है?
उत्तर: यह वीडियो सहकर्मी के इस्तीफे के बाद बिना वेतन वृद्धि के अतिरिक्त काम सौंपने की कॉर्पोरेट प्रथा पर आधारित है।
प्रश्न 2: क्या कंपनियां कानूनी रूप से अतिरिक्त काम दे सकती हैं?
उत्तर: कंपनियां काम का वितरण कर सकती हैं, लेकिन अनुबंध की शर्तों और श्रम कानूनों के तहत उचित मुआवजे का अधिकार कर्मचारियों के पास होता है।