मध्य पूर्व में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाओं के कारण एशियाई देश अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक तेल और गैस भंडार बनाने की दौड़ में शामिल हो गए हैं।

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण एशिया की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।
  • जापान और भारत जैसे देश अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
  • एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अब आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं।

मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण धमनी है, वहां ईरानी हमलों और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण शिपिंग लगभग ठप हो गई है। इस संकट ने एशियाई देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रह सकते।

रणनीतिक भंडारण की नई दौड़

एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अब एक स्थायी समाधान की तलाश में हैं: अपनी ऊर्जा जरूरतों को भौगोलिक रूप से अपने करीब लाना। ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज की शोध फेलो पारुल बख्शी के अनुसार, यह संकट दो प्रकार के निवेश को जन्म दे रहा है—एक जो भू-राजनीतिक जोखिमों को दरकिनार करता है और दूसरा जो आयातित ईंधन पर निर्भरता को ही समाप्त कर देता है।

जापान इस दिशा में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। टोक्यो ने अपनी विशाल रणनीतिक तेल भंडार क्षमता का उपयोग करते हुए संकट को बेहतर ढंगरे संभाला है। जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने $10 बिलियन की 'POWERR Asia' पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को तेल भंडारण और सुरक्षा में मदद करना है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा केवल आपूर्ति सुनिश्चित करने के बारे में नहीं है, बल्कि आपूर्ति के मार्ग को सुरक्षित करने के बारे में भी है। यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे रास्ते बंद हो जाते हैं, तो बिना पर्याप्त भंडार वाले देशों की अर्थव्यवस्थाएं ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं।

संकट भू-राजनीतिक जोखिमों को दरकिनार करने वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति दे रहा है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देश अब अपने राष्ट्रीय भंडार को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के 90-दिवसीय मानक के करीब लाने के लिए कानून बना रहे हैं। वहीं, भारत भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। ऑयल नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने दक्षिण भारत में 1.75 मिलियन मीट्रिक टन का नया भंडार बनाने की घोषणा की है।

प्रमुख देशों की वर्तमान स्थिति

देशवर्तमान स्थिति/योजनालक्ष्य/रणनीति
जापानविशाल रणनीतिक भंडारPOWERR Asia के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग
भारत74 दिनों का भंडारONGC द्वारा भारी विस्तार
थाईलैंड61 दिनों का भंडारक्रॉस-पेनिनसुला पाइपलाइन और टैंक फार्म
फिलीपींस50-60 दिनों का भंडार60-दिवसीय सरकारी भंडार बिल पारित

चीन, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है, भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क है। बीजिंग अब ऐसे बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है जो उसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से बचा सके।

Did You Know?: हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल वैश्विक बाजारों तक पहुँचता है।

प्रश्न 2: 'POWERR Asia' क्या है?
उत्तर: यह जापान की एक $10 बिलियन की पहल है जो एशियाई देशों को ऊर्जा सुरक्षा और भंडारण क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।