एक्सिस एनर्जी ने अनंतपुर में 552 मेगावाटप के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी (EPC) अनुबंध हासिल किया है। यह परियोजना एव्रेन के पवन-सौर हाइब्रिड प्रोजेक्ट का हिस्सा है और अगले 18 महीनों में चालू होने की उम्मीद है।

  • एक्सिस एनर्जी को अनंतपुर में 552 MWp सौर परियोजना के लिए EPC अनुबंध मिला है।
  • यह परियोजना एव्रेन (Brookfield और Axis Energy का संयुक्त उद्यम) द्वारा विकसित की जा रही है।
  • परियोजना को 18 महीनों के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • यह पवन-सौर हाइब्रिड मॉडल और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के साथ एकीकृत है।

अनंतपुर, आंध्र प्रदेश: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए, Axis Energy ने आंध्र प्रदेश के Anantapur जिले में एक विशाल 552 MWp यूटिलिटी-स्केल सौर ऊर्जा परियोजना के लिए इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) अनुबंध सुरक्षित कर लिया है। यह परियोजना Evren द्वारा विकसित की जा रही है, जो वैश्विक निवेश फर्म Brookfield और Axis Energy का एक रणनीतिक संयुक्त उद्यम है।

यह सौर परियोजना केवल एक स्टैंडअलोन प्लांट नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक 400 MW पवन-सौर हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का एक अभिन्न अंग है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका Battery Energy Storage Systems (BESS) के साथ एकीकरण है। यह तकनीक सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता को दूर करने और ग्रिड को निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी। राज्य की पीक पावर डिमांड (अधिकतम बिजली मांग) को पूरा करने के लिए यह हाइब्रिड मॉडल अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैटरी स्टोरेज के माध्यम से, यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जब सूर्य नहीं चमक रहा हो या हवा कम हो, तब भी ग्रिड को विश्वसनीय बिजली मिलती रहे।

यह हाइब्रिड मॉडल और स्टोरेज का संयोजन भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।

एक्सिस एनर्जी के सीईओ Murali Surapaneni ने इस घोषणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह परियोजना एव्रेन के साथ उनकी दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना को AP Southern Power Distribution Company Limited (APSPDCL) के साथ दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) का समर्थन प्राप्त है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत पिछले कुछ वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा के मिश्रण (Hybridization) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक सौर परियोजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती रात के समय या बादलों वाले मौसम में बिजली की उपलब्धता है। बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड मॉडल इसी कमी को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो ग्रिड स्थिरता को बढ़ाते हैं।

Did You Know?: हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाएं एक ही स्थान पर दो अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके भूमि और बुनियादी ढांचे की लागत को काफी कम कर देती हैं।

Frequently Asked Questions

1. यह परियोजना कब तक पूरी होगी?
प्रबंधन के अनुसार, इस परियोजना को अगले 18 महीनों के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

2. इस परियोजना का मुख्य लाभ क्या है?
यह परियोजना राज्य की पीक बिजली मांग को पूरा करने और ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगी।