बिहार अपने बढ़ते बिजली संकट और भारी वित्तीय घाटे को देखते हुए 2030 तक 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए ₹1.38 लाख करोड़ के बड़े निवेश की योजना बना रहा है।

  • बिहार 2030 तक 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा और 6 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता का लक्ष्य रख रहा है।
  • राज्य ₹1.38 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश के माध्यम से सौर ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विस्तार करेगा।
  • वर्तमान में बिहार को बिजली खरीदने के लिए सालाना ₹25,000 से ₹35,000 करोड़ खर्च करने पड़ रहे हैं।

बिहार, जो लंबे समय से ऊर्जा की कमी और भारी वित्तीय बोझ से जूझ रहा है, अब सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी किस्मत बदलने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों में ₹1.38 लाख करोड़ के निवेश का एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

वर्तमान वित्तीय स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में बिजली उपभोक्ताओं से ₹19,000 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, लेकिन बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने में राज्य को सालाना ₹25,000 करोड़ से ₹35,000 करोड़ के बीच खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 1.89 करोड़ उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के कारण राज्य पर ₹3,800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ भी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार की यह रणनीति केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। राज्य की वर्तमान उत्पादन क्षमता मात्र 550 MW है, जबकि गर्मियों में मांग 9,500 MW तक पहुंच जाती है। 2030 तक मांग 11,700 MW को पार करने का अनुमान है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन जाएगी।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता ही बिहार की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने का एकमात्र दीर्घकालिक समाधान है।

नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025 के तहत, बिहार का लक्ष्य 2030 तक 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 GWh ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करना है। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड सीधे तौर पर ₹82,679 करोड़ उत्पादन संपत्तियों, जैसे पंप स्टोरेज और सौर संयंत्रों में निवेश करेगी। इसके अलावा, ₹24,683 करोड़ का निवेश 680 सर्किट-किलोमीटर के 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर' के निर्माण के लिए किया जाएगा।

राज्य के प्रमुख सौर प्रोजेक्ट्स में लखीसराय में ₹2,866 करोड़ की लागत वाला कजरा सौर ऊर्जा संयंत्र शामिल है, जो 301 MW सौर क्षमता और 523 MWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के साथ आएगा। इसके अलावा औरंगाबाद में 150 MW का सौर पार्क और केंद्र की 'सूर्य संकल्प' योजना के तहत सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर का काम भी तेजी से चल रहा है।

Did You Know?: बिहार में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या पिछले 20 वर्षों में 17 लाख से बढ़कर 2.2 करोड़ से अधिक हो गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बिहार का सौर ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
उत्तर: बिहार का लक्ष्य 2030 तक 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा और 6 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करना है।

प्रश्न 2: बिजली की कमी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: बिहार की अपनी उत्पादन क्षमता केवल 550 MW है, जबकि मांग गर्मियों में 9,500 MW तक पहुंच जाती है।