मैसूर के ननराज बहादुर चौल्ट्री में 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय 'देसी सोप्पू मेला' आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक और विलुप्त होती खाद्य विरासत को पुनर्जीवित करना है। इस मेले में 150 से अधिक प्रकार की स्वदेशी हरी सब्जियां, मोटे अनाज और पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे।
- 5 और 6 सितंबर को मैसूर के ननराज बहादुर चौल्ट्री में दो दिवसीय मेला।
- 150 से अधिक स्वदेशी और प्राकृतिक रूप से उगने वाली हरी सब्जियों का प्रदर्शन।
- पारंपरिक भोजन, मोटे अनाज, और औषधीय पौधों का संगम।
- बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता और विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवर्धक सत्र।
कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में पारंपरिक खाद्य विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आगामी 5 और 6 सितंबर को ननराज बहादुर चौल्ट्री में आयोजित होने वाला 'देसी सोप्पू मेला' न केवल स्थानीय किसानों के लिए एक मंच है, बल्कि यह उन लुप्त होती खाद्य परंपराओं को भी पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है जो हमारी दादी-नानी के समय का हिस्सा थीं।
इस मेले का आयोजन सहजा समृद्ध, यूजिंग डाइवर्सिटी, हुलिकडू फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी और ICAR-JSS कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन 'खरपतवार' समझे जाने वाले पौधों की पहचान करना और उन्हें महत्व देना है, जो वास्तव में अत्यधिक पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक आहार में पोषक तत्वों की कमी का एक बड़ा कारण पारंपरिक हरी सब्जियों का हमारे भोजन से गायब होना है। यह मेला उपभोक्ताओं को सीधे उन किसानों से जोड़ता है जो बीज और पौधों की विविधता को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
"जिन्हें हम अक्सर खेतों की मेड़ों या सड़कों के किनारे उगने वाला खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, वे वास्तव में हमारे पारंपरिक स्वास्थ्य और पोषण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।" - कृष्णप्रसाद, सहजा समृद्ध।
मेले की मुख्य विशेषताएं कई प्रकार की दुर्लभ किस्मों को प्रदर्शित करना है। उत्तरी कर्नाटक से किरकासाली सोपू और गोकर्ण से केम्पू सोपू जैसी दुर्लभ सब्जियां यहां आकर्षण का केंद्र होंगी। इसके अलावा, कनकपुरा की महिला समूह द्वारा पारंपरिक 'मुद्दे' और 'सोप्पिना सारु' (हरी सब्जी का शोरबा) परोसा जाएगा।
विशेष कार्यक्रम और कार्यशालाएं
मेले के दौरान 'अज्जिया मदिलु, सोप्पिना कडालु' (दादी की गोद, हरी सब्जियों का सागर) नामक एक विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें जी.एल. मुरलीधर और श्रीवत्स जैसे विशेषज्ञ घरेलू स्तर पर औषधीय सब्जियां उगाने और उनके उपयोग पर सत्र लेंगे। विशेष रूप से, हावेरी की नीलम्मा केमन्नावर, जिन्हें 'हरी सब्जियों का चलता-फिरता विश्वकोश' कहा जाता है, अपनी दुर्लभ किस्मों के साथ उपस्थित रहेंगी।
मेले में उपलब्ध वस्तुएं
| श्रेणी | उपलब्ध वस्तुएं |
|---|---|
| हरी सब्जियां | 150+ स्वदेशी किस्में (किरकासाली, केम्पू सोपू आदि) |
| अनाज और दालें | देसी चावल की किस्में, मोटे अनाज (Millets), दालें |
| अन्य उत्पाद | जैविक मूल्यवर्धित उत्पाद, देशी बीज, फल के पौधे |
Frequently Asked Questions
1. मेला कहाँ और कब आयोजित हो रहा है?
यह मेला 5 और 6 सितंबर को मैसूर के ननराज बहादुर चौल्ट्री में आयोजित किया जाएगा।
2. क्या बच्चों के लिए कोई गतिविधि है?
हाँ, रविवार सुबह 10:30 बजे 5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए एक ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।