कर्नाटक सरकार ने 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता को 39 GW से बढ़ाकर 66 GW करने का एक व्यापक 10-वर्षीय रोडमैप तैयार किया है, जिसमें हरित ऊर्जा पर मुख्य ध्यान दिया गया है।

  • 2030 तक बिजली क्षमता 39 GW से बढ़ाकर 66 GW करने का लक्ष्य।
  • विकास का मुख्य आधार स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन और जलविद्युत) होगा।
  • ₹2-3 लाख करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करने की योजना।
  • बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ग्रिड और स्टोरेज क्षमता पर जोर।

बेंगलुरु: कर्नाटक ने ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता ने नई दिल्ली में आयोजित 'भारत इलेक्ट्रिसिटी एंड इंडियन यूटिलिटी वीक, 2026' के दौरान एक महत्वाकांक्षी 10-वर्षीय रोडमैप का अनावरण किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य की वर्तमान 39 GW की स्थापित क्षमता को 2030 तक बढ़ाकर 66 GW करना है।

राज्य में बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मांग 210 MU से बढ़कर 310-350 MU के बीच पहुंच गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण बेंगलुरु, मैसूरु और मंगलुरु जैसे शहरों में बड़े डेटा केंद्रों का विकास, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बढ़ता चलन और तीव्र औद्योगिक विस्तार है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक का यह कदम न केवल राज्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सौर और पवन ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता राज्य को एक 'ग्रीन एनर्जी हब' के रूप में स्थापित कर रही है।

कर्नाटक का ऊर्जा संक्रमण ग्रिड लचीलेपन और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के माध्यम से समर्थित होगा।

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्नाटक कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें शरावती पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (2,000 MW) और महत्वपूर्ण KPTCL सबस्टेशनों पर बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की तैनाती शामिल है। इसके अलावा, पवगडा सौर पार्क का विस्तार और PM-KUSUM जैसी योजनाओं के माध्यम से कृषि फीडरों का सौरकरण भी प्राथमिकता है।

निवेशकों के लिए खुशखबरी यह है कि कर्नाटक बिजली क्षेत्र में अगले चार से पांच वर्षों में ₹2-3 लाख करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है। राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि ट्रांसमिशन में कोई देरी न हो और बिजली उत्पादकों को भुगतान समय पर मिले, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक लंबे समय से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी रहा है। राज्य की वर्तमान ऊर्जा संरचना में दो-तिहाई हिस्सा स्वच्छ जलविद्युत और नवीकरणीय स्रोतों का है, जो इसे देश के सबसे टिकाऊ राज्यों में से एक बनाता है।

Did You Know?: कर्नाटक के KPTCL ने ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को 3% से भी कम रखने में सफलता प्राप्त की है, जो वैश्विक मानकों में अत्यंत प्रभावशाली है।

Frequently Asked Questions

1. कर्नाटक 2030 तक कितनी बिजली क्षमता का लक्ष्य रख रहा है?
कर्नाटक 2030 तक 66 GW की स्थापित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है।

2. बिजली की मांग बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और औद्योगिक विस्तार बिजली की मांग बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं।