तमिलनाडु सरकार की नई MSME नीति में बुनियादी ढांचे और सौर ऊर्जा सब्सिडी की कमी को लेकर मदुरै के उद्योग जगत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। MADITSSIA ने सरकार से मांग की है कि औद्योगिक कॉरिडोर और बिजली शुल्कों पर पुनर्विचार किया जाए।

  • MADITSSIA ने बुनियादी ढांचे के लिए 100% सब्सिडी की मांग की, लेकिन सरकार ने केवल 50% ही दी।
  • मदुरै-थूथुकुडी औद्योगिक कॉरिडोर के लिए किसी वित्तीय आवंटन की घोषणा नहीं की गई।
  • सौर ऊर्जा स्थापना के लिए 25% सब्सिडी की मांग को नजरअंदाज किया गया।
  • निवेश सब्सिडी और स्टार्टअप फंड के लिए किए गए आवंटन का स्वागत किया गया।

तमिलनाडु के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए हाल ही में विधानसभा में की गई घोषणाओं ने उद्योग जगत के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। मदुरै जिला लघु और सूक्ष्म उद्योग संघ (MADITSSIA) ने एमएसएमई मंत्री पी. मथन राजा द्वारा पेश की गई नीति में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगों की अनदेखी करने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है।

MADITSSIA के अध्यक्ष वी. सेंथिलकुमार ने स्पष्ट किया कि निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचे की सुविधाओं हेतु केवल मौजूदा 50% सब्सिडी की ही घोषणा की गई है। उद्योग जगत लंबे समय से सरकार से 100% बुनियादी ढांचा सुविधा प्रदान करने की मांग कर रहा था, जिसे इस नीति में पूरी तरह से छोड़ दिया गया है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब तक छोटे उद्योगों को बुनियादी ढांचे और सस्ती ऊर्जा की सुविधा नहीं मिलेगी, तब तक क्षेत्रीय औद्योगिक विकास की गति धीमी बनी रहेगी। बिजली के निश्चित शुल्कों में कमी न होना और आवासीय उपभोक्ताओं की तरह सौर सेट-ऑफ सुविधा का न मिलना छोटे व्यवसायों के परिचालन खर्च (OPEX) को बढ़ा रहा है।

बुनियादी ढांचे में निवेश की कमी और सौर ऊर्जा सब्सिडी का अभाव MSME क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।

एक और बड़ा मुद्दा मदुरै-थूथुकुडी औद्योगिक कॉरिडोर का है। संघ ने इस बात पर निराशा जताई कि इस महत्वपूर्ण गलियारे के विकास के लिए कोई विशेष वित्तीय आवंटन या घोषणा नहीं की गई। इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक 25% सौर ऊर्जा सब्सिडी का प्रावधान भी नीति में नहीं देखा गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु ऐतिहासिक रूप से भारत के विनिर्माण केंद्रों में से एक रहा है, लेकिन एमएसएमई क्षेत्र अक्सर बुनियादी ढांचे की कमी और उच्च परिचालन लागतों के कारण संघर्ष करता रहा है। मदुरै जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास सीधे तौर पर सरकारी नीति और कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है।

हालांकि, कुछ सकारात्मक पहलुओं को भी स्वीकार किया गया है। MADITSSIA ने निवेश सब्सिडी योजना के तहत लंबित आवेदनों के लिए ₹600 करोड़ के आवंटन का स्वागत किया है। साथ ही, 'TN सिंगल विंडो पोर्टल' के माध्यम से लाइसेंस जारी करना और प्रत्येक जिले में क्रेडिट काउंसलर की नियुक्ति को उद्यमियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।

Did You Know?: तमिलनाडु भारत के उन राज्यों में से एक है जो स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 'स्मार्ट सीड फंड' जैसी योजनाएं चलाता है।

Frequently Asked Questions

1. MADITSSIA की मुख्य मांग क्या थी?
MADITSSIA ने निजी औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 100% बुनियादी ढांचा सब्सिडी और सौर ऊर्जा के लिए 25% सब्सिडी की मांग की थी।

2. सरकार ने कौन से सकारात्मक कदम उठाए हैं?
सरकार ने लंबित सब्सिडी के लिए ₹600 करोड़ आवंटित किए हैं और स्टार्टअप्स के लिए ₹25 लाख तक की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।