तमिलनाडु के सेलम जिले में महिला सशक्तिकरण की एक बड़ी लहर देखी जा रही है, जहाँ 5,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ₹408.67 करोड़ का ऋण प्रदान किया गया है। यह कदम ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।

  • सेलम जिले में 5,027 महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹408.67 करोड़ का ऋण प्राप्त हुआ।
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों के भीतर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की गई।
  • तमिलनाडु राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (TNSRLM) और महलिर थिट्टम इस पहल के मुख्य स्तंभ हैं।
  • ऋण का उद्देश्य पशुपालन, मोटे अनाज की खेती और लघु उद्योगों को बढ़ावा देना है।

तमिलनाडु के सेलम जिले में महिला उद्यमिता के एक नए युग की शुरुआत हुई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों के भीतर, जिले के 5,027 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कुल ₹408.67 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है। जिला कलेक्टर के. इलंबहावत ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना है।

सेलम की अर्थव्यवस्था में कृषि और शहरी वाणिज्य का एक अनूठा मिश्रण है। जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य इन दोनों क्षेत्रों को एकीकृत करना है ताकि घरेलू आय में वृद्धि हो सके और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को मजबूती मिल सके। कलेक्टर के अनुसार, जिले में कुल 20,756 महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 15,265 ग्रामीण क्षेत्रों में और 5,491 शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सूक्ष्म वित्त (Microfinance) का यह बड़े पैमाने पर प्रवाह केवल ऋण वितरण नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर आर्थिक संरचना को बदलने की एक रणनीति है। जब महिलाओं को पूंजी मिलती है, तो वह सीधे तौर पर परिवार के पोषण, शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था के चक्र में निवेश की जाती है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सामाजिक सशक्तिकरण की असली कुंजी है, और सेलम का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

महलिर थिट्टम योजना के तहत दिए गए इस फंड का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। इनमें पशुपालन, मोटे अनाज (millet) की खेती, बीज उत्पादन और वन-स्टॉप सर्विस सेंटर की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 67 समूहों को सामुदायिक निवेश कोष (CIF) के रूप में ₹1 करोड़ और 44 समूहों को रिवॉल्विंग फंड के रूप में सहायता प्रदान की गई है।

वित्तीय सहायता का विवरण

योजना/श्रेणीलाभार्थी/राशिमुख्य उद्देश्य
महलिर थिट्टम ऋण₹408.67 करोड़ (5,027 SHGs)आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार
सामुदायिक निवेश कोष (CIF)₹1 करोड़ (67 SHGs)सामुदायिक विकास
बैंक ऋण (विभिन्न योजनाएं)₹198.30 करोड़ (19,579 महिलाएं)पशुपालन, खेती और लघु उद्योग

यह पहल न केवल महिलाओं को आय के साधन प्रदान करती है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी शामिल करती है। शहरी क्षेत्रों में कौशल विकास और छोटे व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-आधारित आजीविका को प्राथमिकता दी जा रही है।

Did You Know?: स्वयं सहायता समूह (SHGs) न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि वे महिलाओं के लिए सामाजिक समर्थन और नेतृत्व कौशल विकसित करने का एक प्रमुख मंच भी हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सेलम में महिला समूहों को ऋण देने वाली मुख्य योजना कौन सी है?
उत्तर: महलिर थिट्टम और तमिलनाडु राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (TNSRLM) प्रमुख योजनाएं हैं।

प्रश्न 2: इन ऋणों का उपयोग किस प्रकार के व्यवसायों के लिए किया जा सकता है?
उत्तर: इनका उपयोग पशुपालन, मोटे अनाज की खेती, बीज उत्पादन और छोटे शहरी व्यवसायों के लिए किया जा सकता है।