भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। RBI की FCNR(B) योजना के माध्यम से भारी विदेशी मुद्रा भंडार आने से रुपये को बड़ी मजबूती मिली है।
- रुपया 94.27 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंचा, जो 29 जून के बाद सबसे मजबूत है।
- RBI की FCNR(B) योजना से 136.37 अरब डॉलर का भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ।
- NRIs ने इस योजना के माध्यम से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को नई ताकत दी है।
भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को एक बड़ी हलचल देखी गई जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 94.27 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले दो महीनों (29 जून के बाद) का सबसे ऊंचा स्तर है। बुधवार को रुपया 94.98 पर बंद हुआ था, जिससे यह स्पष्ट है कि भारतीय मुद्रा में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की इस मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रणनीतिक योजना का हाथ है। RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और रुपये को स्थिरता देने के लिए 'फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक)' यानी FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम का सहारा लिया था। इस योजना ने उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए 31 अगस्त तक कुल 136.37 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह सुनिश्चित किया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि रुपये की यह मजबूती केवल एक बाजार उतार-चढ़ाव नहीं है, बल्कि यह भारत के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और RBI की कुशल प्रबंधन क्षमता का प्रमाण है। यदि रुपया 94 के स्तर के नीचे बना रहता है, तो यह निर्यातकों के लिए हेजिंग की संभावनाओं को बढ़ा सकता है, जिससे रुपया भविष्य में 92.50 तक जा सकता है।
FCNR(B) योजना के माध्यम से आए विशाल फंड ने न केवल डॉलर की कमी को पूरा किया है, बल्कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली में तरलता (Liquidity) को भी बढ़ा दिया है।
इस योजना की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय प्रवासी भारतीयों (NRIs) को जाता है। आंकड़ों के अनुसार, FCNR(B) डिपॉजिट से अकेले 127.2 अरब डॉलर प्राप्त हुए। यह राशि उस अनुमान से कहीं अधिक है जो शुरुआत में 50-60 अरब डॉलर के आसपास लगाया गया था। इस भारी निवेश ने पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पन्न होने वाले दबाव को कम करने में मदद की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जून 2024 के दौरान, वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के कारण भारतीय रुपये पर भारी दबाव था। उस संकटपूर्ण समय में, RBI ने 8 जून को यह विशेष विदेशी मुद्रा योजना शुरू की थी ताकि डॉलर की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और रुपये के क्रमिक अवमूल्यन को रोका जा सके।
Frequently Asked Questions
1. रुपये की मजबूती का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण RBI की FCNR(B) योजना के माध्यम से आया भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह और मजबूत GDP आंकड़े हैं।
2. क्या रुपया और मजबूत हो सकता है?
हाँ, यदि रुपया 94 के स्तर के नीचे स्थिर रहता है, तो विश्लेषकों का मानना है कि यह 92.50 तक जा सकता है।