मालाबार मिल्मा ने उत्तरी केरल के डेयरी किसानों को राहत देने के लिए ₹1.72 करोड़ की सब्सिडी मंजूर की है, जिससे पशु आहार की कीमतें कम हो जाएंगी। यह योजना सितंबर 2026 के दौरान छह जिलों के एक लाख से अधिक किसानों को लाभान्वित करेगी।

  • मालाबार मिल्मा ने ₹1.72 करोड़ का सब्सिडी बजट आवंटित किया है।
  • 'गोमती गोल्ड' पशु आहार पर सब्सिडी को दोगुना कर ₹200 प्रति बैग कर दिया गया है।
  • यह लाभ पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड के 1,00,000 से अधिक किसानों को मिलेगा।

केरल के डेयरी क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मालाबार क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (मालाबार मिल्मा) ने अपने प्रशासनिक समिति की बैठक में पशुपालकों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से पशु आहार सब्सिडी में भारी वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत कुल ₹1.72 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

नई संशोधित योजना के तहत, मिल्मा के संतुलित पशु आहार, 'गोमती गोल्ड' के लिए सब्सिडी को दोगुना करके ₹200 प्रति 50-किलोग्राम बैग कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, उच्च उपज देने वाली गायों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए 'मिल्मा बाईपास' आहार पर ₹100 प्रति 50-किलोग्राम बैग की सब्सिडी दी जाएगी। यह रियायती दरें सितंबर 2026 के दौरान पूरे मालाबार क्षेत्र की प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों में उपलब्ध रहेंगी।

पशु आहार सब्सिडी संरचना

आहार का प्रकारसब्सिडी राशि (प्रति 50kg बैग)
गोमती गोल्ड (Gomathi Gold)₹200
मिल्मा बाईपास (Milma Bypass)₹100

इसके अलावा, मालाबार ग्रामीण विकास फाउंडेशन द्वारा निर्मित 'ट्रू मील TMR' आहार खरीदने वाले किसानों को भी स्थानीय सहकारी समितियों के माध्यम से ₹1 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी प्राप्त होगी। यह व्यापक योजना उत्तरी केरल के छह महत्वपूर्ण जिलों—पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड—में फैली हुई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पशु आहार की बढ़ती लागत डेयरी उद्योग के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है। मिल्मा का यह कदम न केवल छोटे किसानों की लागत कम करेगा, बल्कि दूध उत्पादन की स्थिरता को भी सुनिश्चित करेगा। सब्सिडी का सीधा लाभ 1,000 से अधिक सहकारी समितियों के माध्यम से 1,00,000 से अधिक सक्रिय डेयरी किसानों तक पहुँचेगा।

पशु आहार पर सब्सिडी में यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

इस घोषणा के साथ ही, मिल्मा के अध्यक्ष के.एस. मणि और प्रबंध निदेशक एन.के. प्रेमलाल ने एक मानवीय पहल भी की। उन्होंने मलप्पुरम जिले की कल्कुंडु डेयरी सहकारी समिति की दिवंगत अध्यक्ष प्रभाथा के आश्रितों के लिए ₹1 लाख की आपातकालीन सहायता राशि की भी पुष्टि की, जिनका बिजली का झटका लगने से निधन हो गया था।

Historical Background

केरल में डेयरी सहकारी मॉडल, विशेष रूप से मिल्मा, दशकों से ग्रामीण आजीविका का आधार रहा है। सहकारी समितियों के माध्यम से सब्सिडी का वितरण यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी और संस्थागत सहायता अंतिम छोर के किसान तक बिना किसी बिचौलिए के पहुँच सके।

Did You Know?: केरल का डेयरी क्षेत्र सहकारी मॉडल पर अत्यधिक निर्भर है, जो किसानों को बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

1. सब्सिडी किन जिलों में लागू है?
यह सब्सिडी पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में लागू है।

2. गोमती गोल्ड पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
गोमती गोल्ड के प्रत्येक 50-किलोग्राम बैग पर ₹200 की सब्सिडी दी जाएगी।