पंजाब में मानसून की 36% कमी और धान की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों पर बढ़ते दबाव के कारण बिजली की मांग में 140% का उछाल आया है। इस संकट से निपटने के लिए राज्य को एक ही दिन में ₹119.5 करोड़ की बिजली खरीदनी पड़ी है।

  • पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 16,343 MW तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 139.3% अधिक है।
  • मानसून में 36% की कमी के कारण किसान भूजल और पंप सेटों पर निर्भर हैं।
  • राज्य को एक दिन में 2,709 लाख यूनिट बिजली खरीदनी पड़ी, जिसकी लागत लगभग ₹119.5 करोड़ रही।
  • कर्मचारियों की हड़ताल और थर्मल प्लांट की कम क्षमता ने संकट को और गहरा कर दिया है।

पंजाब में कृषि और घरेलू मांग के बीच बिजली का संकट गहरा गया है। मानसून की भारी कमी के कारण किसान अब धान की फसल को बचाने के लिए पूरी तरह से ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भर हैं। इसी कारण बुधवार को राज्य की बिजली की अधिकतम मांग पिछले साल के इसी दिन की तुलना में 139.3 प्रतिशत बढ़कर 16,343 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई।

इस भारी मांग को पूरा करने के लिए, पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को बाजार से 2,709.45 लाख यूनिट बिजली खरीदनी पड़ी। इस आपातकालीन खरीद की अनुमानित लागत लगभग ₹119.5 करोड़ रही। राज्य सरकार के सामने यह स्थिति न केवल कृषि जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि सब्सिडी वाले बिजली बिलों का बोझ उठाने की भी है।

क्यों बढ़ रहा है यह संकट?

वित्त मंत्री हरपाल चीमा के अनुसार, पंजाब में मानसून 36% कम रहा है। इस सूखे जैसी स्थिति ने किसानों को मजबूर किया है कि वे धान की पानी सोखने वाली फसल के लिए पंप सेटों का अधिक उपयोग करें। इसके अलावा, बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों की चल रही हड़ताल ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है, जिससे राज्य के अपने थर्मल पावर प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।

मानसून की कमी और कर्मचारियों की हड़ताल ने मिलकर पंजाब के पावर ग्रिड पर अभूतपूर्व दबाव बना दिया है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिजली की इस कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। जालंधर, लुधियाना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में उद्योगों को लगभग 3 घंटे 45 मिनट तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है।

घरेलू मांग में भी भारी उछाल

एक बिजली विभाग के इंजीनियर ने बताया कि केवल कृषि ही नहीं, बल्कि घरेलू बिजली की खपत में भी भारी वृद्धि हुई है। इसका एक मुख्य कारण सरकार की 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना है। इस योजना के चलते कई परिवारों ने नए एयर कंडीशनर (AC) और अन्य भारी उपकरण लगाए हैं, जिससे ग्रिड पर लोड बढ़ गया है।

बिजली आपूर्ति का तुलनात्मक विवरण

स्रोत (Source)उपलब्धता (Lakh Units)विशेष टिप्पणी
राज्य के अपने स्रोत612.65थर्मल और जल विद्युत परियोजनाओं से
बाहरी खरीद (Purchased)2,709.45बाजार और टेंडर के माध्यम से
कुल मांग (Total Demand)3,347.81कृषि और घरेलू उपयोग हेतु

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कटौती से बचाने की कोशिश कर रही है, जिसके लिए वह महंगी दर पर बाहर से बिजली खरीदने को तैयार है। हालांकि, उद्योगों का कहना है कि रात के समय की कटौती से उनकी उत्पादन क्षमता और मशीनरी को नुकसान हो रहा है।

Frequently Asked Questions

1. पंजाब में बिजली की मांग इतनी क्यों बढ़ी?
मानसून की 36% कमी के कारण धान की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों का उपयोग बढ़ा है और घरेलू खपत में भी इजाफा हुआ है।

2. बिजली कटौती का असर किन क्षेत्रों पर पड़ रहा है?
मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों (Category-II और III) में बिजली कटौती की जा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

Did You Know?: पंजाब में बिजली की मांग में एक साल के भीतर 139% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो एक ऐतिहासिक उछाल है।