भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक नकदी (liquidity) के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय की रिवर्स रेपो दरों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

  • RBI ने बैंकिंग प्रणाली में बढ़ती तरलता को सोखने के लिए लंबे समय के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) का उपयोग किया है।
  • कुल ₹6.02 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी को दो VRRR ऑक्शन के माध्यम से नियंत्रित किया गया।
  • भारतीय बैंक भी विदेशी मुद्रा (FX) स्वैप के माध्यम से अतिरिक्त नकदी निकालने में मदद कर रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की बैंकिंग प्रणाली में तरलता के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के बाद एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाजार में नकदी की अधिकता को नियंत्रित करने के लिए, केंद्रीय बैंक अब लंबे समय की अवधि वाले Variable Rate Reverse Repo (VRRR) ऑक्शन का सहारा ले रहा है। यह रणनीति मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने और बाजार में ब्याज दरों को स्थिर रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में तरलता का अधिशेष (surplus) अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए, RBI ने दो अलग-अलग VRRR ऑक्शन के माध्यम से लगभग ₹6.02 लाख करोड़ की नकदी को सोख लिया है। इसके अतिरिक्त, 7 सितंबर को ₹7 लाख करोड़ के 30-दिवसीय VRRR ऑक्शन की योजना भी बनाई गई है, जो दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक इस चुनौती को गंभीरता से ले रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जब बाजार में बहुत अधिक नकदी होती है, तो यह मुद्रास्फीति (inflation) को बढ़ा सकती है और ब्याज दरों में अस्थिरता पैदा कर सकती है। RBI का यह हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने के लिए है कि ऋण की लागत और बाजार की स्थितियां अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप बनी रहें।

तरलता का अत्यधिक अधिशेष वित्तीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है, जिसे नियंत्रित करना केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता है।

इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के भारतीय बैंक भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैंक अतिरिक्त नकदी को प्रबंधित करने के लिए Foreign Exchange (FX) sell/buy swaps का प्रस्ताव दे रहे हैं। यह एक बहुआयामी दृष्टिकोण है जहाँ केंद्रीय बैंक और वाणिज्यिक बैंक मिलकर बाजार की स्थिरता सुनिश्चित कर रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

ऐतिहासिक रूप से, RBI ने विभिन्न आर्थिक चक्रों के दौरान तरलता प्रबंधन के लिए अलग-अलग उपकरणों का उपयोग किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान, तरलता बढ़ाने के लिए उदार मौद्रिक नीति अपनाई गई थी, लेकिन वर्तमान में, अर्थव्यवस्था के सामान्य होने के साथ, केंद्रीय बैंक का ध्यान अब 'लिक्विडिटी मैनेजमेंट' और 'इन्फ्लेशन कंट्रोल' पर केंद्रित है।

Did You Know?: रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी को केंद्रीय बैंक के पास जमा करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. VRRR क्या है?
यह एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से RBI बाजार से अतिरिक्त नकदी को एक निश्चित अवधि के लिए सोखता है।

2. अत्यधिक तरलता का क्या प्रभाव पड़ता है?
अत्यधिक नकदी से मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।