कोयला मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि सरकार की कोयला गैसीकरण योजना को कोई नहीं अपना रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि TFL और NTPC जैसे बड़े दिग्गजों ने पहले ही आवेदन कर दिए हैं।
- कोयला मंत्रालय ने 'कोई आवेदक नहीं' होने के दावों को गलत बताया।
- TFL और NTPC ने आधिकारिक तौर पर गैसिफिकेशन योजना के लिए आवेदन किया है।
- सरकार ने ₹37,500 करोड़ का विशाल पैकेज मंजूरी दी है।
- बड़े निवेश को देखते हुए 'रोलिंग-राउंड' आवेदन तंत्र लागू किया गया है।
नई दिल्ली: भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना (Coal Gasification Incentive Scheme) को कोई भी कंपनी नहीं अपना रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।
मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि हितधारकों के साथ चर्चा के बाद यह पुष्टि हुई है कि Talcher Fertilisers Ltd (TFL) और NTPC Ltd ने 7 सितंबर की समय सीमा से पहले ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन जमा कर दिए हैं। यह कदम दर्शाता है कि देश के ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र की बड़ी कंपनियां इस योजना में गहरी रुचि ले रही हैं।
परियोजना का विवरण और निवेश
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई को सतह कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए ₹37,500 करोड़ के भारी-भरकम पैकेज को मंजूरी दी थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और कोयले का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
Talcher Fertilisers Ltd (TFL), जो कि Rashtriya Chemicals and Fertilisers, Coal India, GAIL और Fertiliser Corporation of India का एक संयुक्त उद्यम है, पहले से ही ओडिशा के तालचेर में एक कोयला आधारित अमोनिया-यूरिया गैसीकरण कॉम्प्लेक्स पर काम कर रही है। इस परियोजना में लगभग ₹13,277 करोड़ का निवेश अनुमानित है और इसके वित्त वर्ष 2027-28 तक चालू होने की उम्मीद है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कोयला गैसीकरण भारत की 'नेट जीरो' उत्सर्जन यात्रा और उर्वरक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यदि कंपनियां बड़े पैमाने पर इस तकनीक को अपनाती हैं, तो भारत को आयातित गैस पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कोयला गैसीकरण न केवल ऊर्जा उत्पादन के तरीके को बदल देगा, बल्कि यह भारत के उर्वरक उत्पादन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि कई अन्य संभावित आवेदक भी संपर्क में हैं और उनके प्रोजेक्ट्स वर्तमान में तैयारी के विभिन्न चरणों में हैं। निवेश की विशाल मात्रा और तैयारी की आवश्यकता को देखते हुए, सरकार ने एक 'रोलिंग-राउंड' (Rolling-round) तंत्र अपनाया है। इसके तहत, एक आवेदन विंडो बंद होने के अगले दिन ही अगली विंडो खुल जाएगी, जो दो महीने तक उपलब्ध रहेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत लंबे समय से ऊर्जा के लिए कोयले पर निर्भर रहा है। हालांकि, गैसीकरण तकनीक कोयले को स्वच्छ ईंधन (जैसे सिंथेसिस गैस) में बदलने की क्षमता रखती है, जिससे प्रदूषण कम होता है और उच्च मूल्य वाले रसायनों का उत्पादन संभव होता है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है।
Frequently Asked Questions
1. सरकार ने गैसिफिकेशन योजना के लिए कितना बजट आवंटित किया है?
सरकार ने इस योजना के लिए ₹37,500 करोड़ का पैकेज मंजूर किया है।
2. 'रोलिंग-राउंड' तंत्र क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ आवेदन की खिड़की लगातार खुली रहती है ताकि कंपनियां बड़े निवेश की तैयारी के लिए पर्याप्त समय पा सकें।