तमिलनाडु के रामनाथपुरम में किसान धान की बुवाई के काम में जुट गए हैं, लेकिन उन्हें समय पर फसल ऋण न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से सहकारी बैंकों के माध्यम से तत्काल ऋण उपलब्ध कराने की अपील की है।

  • रामनाथपुरम में धान की बुवाई का सीजन शुरू हो गया है।
  • किसान सहकारी बैंकों से फसल ऋण (Crop Loan) समय पर देने की मांग कर रहे हैं।
  • लागत बढ़ने के कारण प्रति एकड़ ऋण राशि में वृद्धि की आवश्यकता है।

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में कृषि गतिविधियों में तेजी आ गई है। किसान अपने खेतों की जुताई कर रहे हैं और धान की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि, इस उत्साह के बीच किसानों ने एक गंभीर समस्या उठाई है—सहकारी ऋणों की उपलब्धता में देरी।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों के विपरीत, इस वर्ष फसल ऋण मिलने में देरी हो रही है। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख एकड़ भूमि पर धान की खेती की जाती है। किसान मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी मानसून पर निर्भर करते हैं, जिसके कारण अक्टूबर से पहले खेतों को तैयार करना और बीज बोना अनिवार्य हो जाता है।

ऋण राशि और लागत का संकट

वर्तमान में कृषि लागत में भारी वृद्धि हुई है। तमिलनाडु किसान संघ के जिला अध्यक्ष मुथरामु ने बताया कि धान की खेती के लिए प्रति एकड़ ऋण मूल्यांकन में वृद्धि की आवश्यकता है। वर्तमान में, किसानों की मांग है कि उन्हें बिना ब्याज के लगभग 2 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाना चाहिए, क्योंकि बीज, ट्रैक्टर किराया और उर्वरक की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

किसानों को बुवाई के समय ऋण मिलना चाहिए, न कि फसल कटाई के समय, ताकि वे शुरुआती खर्चों को बिना कर्ज के बोझ के पूरा कर सकें।

समस्या यह है कि आमतौर पर सहकारी बैंक नवंबर या दिसंबर में ऋण देना शुरू करते हैं, जब फसल पहले से ही उग चुकी होती है। इससे किसानों को बीज और खाद के लिए निजी साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर पैसा लेना पड़ता है, जो उन्हें कर्ज के जाल में धकेल देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि ऋणों का समय पर वितरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि बुवाई के समय वित्तीय सहायता नहीं मिलती है, तो यह न केवल फसल की पैदावार को प्रभावित करता है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी अस्थिर कर देता है।

किसानों ने जिला कलेक्टर शिवगुरु प्रभाकरन से हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि सहकारी ऋण अधिकारी 'अडंगल' (फसल) प्रमाण पत्र के आधार पर सितंबर और अक्टूबर के महीनों में ही अग्रिम ऋण जारी कर सकें।

Did You Know?: तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में प्रति वर्ष 300 करोड़ रुपये से अधिक का फसल ऋण सहकारी बैंकों के माध्यम से वितरित किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. किसान किस प्रकार के ऋण की मांग कर रहे हैं?
किसान धान की बुवाई के लिए आवश्यक बीज, खाद और ट्रैक्टर किराए के खर्चों हेतु तत्काल सहकारी फसल ऋण की मांग कर रहे हैं।

2. ऋण मिलने में देरी से क्या प्रभाव पड़ता है?
देरी के कारण किसानों को निजी स्रोतों से महंगे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है।