केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने खाद्य कंपनियों द्वारा '100%' शुद्धता के भ्रामक दावों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जानें कैसे कंपनियां पैकेट पर बड़े अक्षरों में दावे करती हैं लेकिन सामग्री में कुछ और ही होता है।

  • CCPA ने '100%' जैसे भ्रामक दावों के लिए कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया है।
  • कंपनियां अक्सर '100% आटा' या '100% जूस' लिखकर ग्राहकों को गुमराह करती हैं।
  • FSSAI ने भी खाद्य व्यवसायों को ऐसे दावों का उपयोग बंद करने की सलाह दी है।

भारत में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उन खाद्य कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जो अपने उत्पादों के पैकेट पर '100%' शुद्धता या पूर्णता के दावे करती हैं। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं के मन में पूर्ण शुद्धता का एक गलत भ्रम पैदा करते हैं, जो वास्तव में उत्पाद के भीतर मौजूद सामग्री से मेल नहीं खाता है।

हाल ही में, CCPA ने Mrs. Bectors Food Specialities (English Oven ब्रांड) और Storia Foods and Beverages जैसी कंपनियों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया। Mrs. Bectors ने अपने उत्पाद को '100% आटा ब्रेड' के रूप में बेचा, जबकि जांच में पाया गया कि उसमें केवल 87% गेहूं का आटा था। कंपनी का तर्क था कि '100% आटा' का मतलब है कि केवल गेहूं का उपयोग किया गया है, लेकिन CCPA ने इसे खारिज करते हुए कहा कि '100%' एक सटीक संख्यात्मक अभिव्यक्ति है और इसका उपयोग अनुमान के तौर पर नहीं किया जा सकता।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खाद्य लेबलिंग के इस नए दौर में कंपनियां 'फाइन प्रिंट' (बारीक अक्षरों) का सहारा लेकर कानूनी खामियों का फायदा उठाती हैं। उपभोक्ता अक्सर पैकेट के सामने वाले हिस्से को देखते हैं और विज्ञापनों से प्रभावित होते हैं, जबकि असली सामग्री की सूची पीछे छोटे अक्षरों में होती है। यह नियामक कार्रवाई सीधे तौर पर उपभोक्ता के 'जानने के अधिकार' को सुरक्षित करती है।

'100%' जैसे शब्दों का उपयोग करना उपभोक्ता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि यह पूर्णता का एक ऐसा भ्रम पैदा करता है जिसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना कठिन है।

इसी तरह, Storia के मामले में, कंपनी ने अपने पेय को '100% टेंडर कोकोनट वाटर' बताया, जबकि उसमें केवल 9.6% कोकोनट वाटर कंसंट्रेट था और बाकी पानी था। नियामक ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उत्पाद रीकंडिश्न्ड (reconstituted) है या उसमें पानी मिलाया गया है, तो उसे '100% प्राकृतिक' कहना कानूनन गलत है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में खाद्य लेबलिंग नियमों को समय-समय पर सख्त किया गया है। 2024 और 2025 के बीच, FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने भी कंपनियों को चेतावनी दी थी कि वे '100%' शब्द का उपयोग करने से बचें क्योंकि मौजूदा नियमों में इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

कंपनी का नामदावा (Claim)वास्तविक सामग्री (Actual Content)
Mrs. Bectors100% Atta Bread87% Whole Wheat Flour
Storia100% Coconut Water9.6% Concentrate + Water
McVitie'sWholewheat Biscuits19.5% Whole Wheat
Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि 'Zero Maida' और '100% Whole Wheat' जैसे शब्दों का एक साथ उपयोग करना उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाने के लिए किया जाता है कि उत्पाद पूरी तरह से स्वस्थ है?

Frequently Asked Questions

1. क्या कंपनियां अब '100%' शब्द का उपयोग बिल्कुल नहीं कर सकतीं?
CCPA और FSSAI के अनुसार, यदि उत्पाद वास्तव में 100% उसी सामग्री से बना है, तो वे दावा कर सकते हैं, लेकिन भ्रामक रूप से इसका उपयोग करना प्रतिबंधित है।

2. अगर पैकेट के पीछे सही जानकारी लिखी है, तो क्या दावा गलत माना जाएगा?
हाँ, यदि पैकेट का मुख्य हिस्सा (Front of Pack) उपभोक्ता को गलत जानकारी देता है, तो पीछे दी गई बारीक जानकारी उसे बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।