एक आरटीआई (RTI) के खुलासे से पता चला है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 15 करोड़ खाते निष्क्रिय हैं और 5.72 करोड़ खातों में कोई पैसा नहीं है।

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के लगभग 59 करोड़ खातों में से 15.36 करोड़ खाते निष्क्रिय हैं।
  • देश में 5.72 करोड़ खातों में शून्य बैलेंस दर्ज किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक शून्य बैलेंस और निष्क्रिय खाते पाए गए हैं।
  • कुल जमा राशि ₹3.15 लाख करोड़ से अधिक है।

हाल ही में प्राप्त एक सूचना का अधिकार (RTI) के जवाब ने भारत की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 59.03 करोड़ से अधिक जन धन खाते हैं, लेकिन इनमें से एक बड़ा हिस्सा केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 15.36 करोड़ खाते निष्क्रिय (Inoperative) श्रेणी में रखे गए हैं, जिसका अर्थ है कि इन खातों में लंबे समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, 5.72 करोड़ खातों में शून्य बैलेंस पाया गया है। हालांकि, योजना के तहत कुल जमा राशि ₹3,15,179.90 करोड़ के विशाल स्तर पर है, जो यह दर्शाता है कि करोड़ों लोगों के पास अभी भी कुछ न कुछ बचत मौजूद है।

राज्यवार स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव

डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ सबसे अधिक 95.92 लाख शून्य-बैलेंस खाते और 3.23 करोड़ निष्क्रिय खाते हैं। इसके बाद बिहार (62.35 लाख शून्य-बैलेंस) और पश्चिम बंगाल का स्थान आता है। उत्तर प्रदेश में कुल जन धन खातों की संख्या भी सबसे अधिक 10.51 करोड़ है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि वित्तीय समावेशन का अर्थ केवल बैंक खाता खोलना नहीं, बल्कि उसका सक्रिय उपयोग सुनिश्चित करना है। यदि करोड़ों खाते निष्क्रिय हैं, तो यह सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

वित्तीय समावेशन की सफलता केवल खाता खोलने की संख्या से नहीं, बल्कि खातों की सक्रियता और उनके माध्यम से होने वाले लेनदेन की निरंतरता से मापी जानी चाहिए।

पीएमजेडीवाई (PMJDY) को अगस्त 2014 में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के रूप में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक परिवार को बैंकिंग सुविधाएं, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था।

Did You Know?: जन धन योजना के तहत कुल खातों में से 32.89 करोड़ खाते महिलाओं और ट्रांसजेंडर खाताधारकों के पास हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Frequently Asked Questions

1. जन धन खाता 'निष्क्रिय' कब माना जाता है?
आमतौर पर, यदि किसी खाते में एक लंबे समय तक (अक्सर 24 महीने) कोई लेनदेन नहीं किया जाता है, तो उसे निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया जाता है।

2. क्या शून्य बैलेंस वाले खातों पर जुर्माना लगता है?
जन धन खातों को विशेष रूप से न्यूनतम शेष राशि (Minimum Balance) की आवश्यकता के बिना संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए शून्य बैलेंस पर कोई जुर्माना नहीं लगता।