बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 17 शहरों में बफर प्याज की सब्सिडी वाली बिक्री शुरू की है। पिछले 10 दिनों में अब तक 4,000 टन प्याज बेचा जा चुका है, जिससे बाजार में राहत मिलने की उम्मीद है।
- सरकार ने 17 शहरों में ₹35 प्रति किलो की दर से बफर प्याज बेचना शुरू किया है।
- पिछले 10 दिनों के भीतर लगभग 4,000 टन प्याज की बिक्री की जा चुकी है।
- 'कांदा एक्सप्रेस' के माध्यम से प्याज की आपूर्ति की जा रही है।
- उपभोक्ता मामलों के सचिव निधि खरे के अनुसार, कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई है।
भारत सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्याज की आसमान छूती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उपभोक्ता मामलों के सचिव निधि खरे ने रविवार को जानकारी दी कि सब्सिडी वाली बिक्री अभियान के पहले 10 दिनों में 17 शहरों में लगभग 4,000 टन बफर प्याज बेचा जा चुका है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना और बाजार में प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
'कांदा एक्सप्रेस' और लॉजिस्टिक्स रणनीति
प्याज की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने एक अनूठी रणनीति अपनाई है। NCCF और Nafed जैसी सरकारी एजेंसियां उत्पादक राज्यों से उपभोग केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए समर्पित रेल रेक, जिसे 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है, और ट्रकों का उपयोग कर रही हैं। भारी मात्रा में खेप पहले ही दिल्ली और चेन्नई पहुंच चुकी है, और अब गुवाहाटी के लिए तीसरी खेप तैयार की जा रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि प्याज जैसी आवश्यक वस्तु की कीमतों में अस्थिरता सीधे तौर पर खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) को प्रभावित करती है। सरकार का यह हस्तक्षेप न केवल कीमतों को स्थिर करने का प्रयास है, बल्कि यह निजी व्यापारियों द्वारा जमाखोरी की संभावनाओं को कम करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक संदेश भी है।
बफर स्टॉक का रणनीतिक उपयोग बाजार में कृत्रिम कमी को दूर करने और उपभोक्ता विश्वास बहाल करने का एक प्रभावी साधन है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सब्सिडी वाली बिक्री के शुरू होने के बाद से औसत अखिल भारतीय खुदरा प्याज की कीमत में गिरावट आई है। जहाँ 28 अगस्त को कीमतें अधिक थीं, वहीं अब बाजार में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि, रबी प्याज की फसल को बेमौसम बारिश के कारण कुछ नुकसान हुआ था, जिससे आपूर्ति पर दबाव बना हुआ था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में प्याज की कीमतों का उतार-चढ़ाव एक आवर्ती समस्या रही है। मानसून की अनिश्चितता और रबी तथा खरीफ फसलों के बीच के अंतराल के कारण अक्सर आपूर्ति में कमी आती है। सरकार ऐतिहासिक रूप से बफर स्टॉक का उपयोग कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करती रही है, लेकिन 'कांदा एक्सप्रेस' जैसे समर्पित लॉजिस्टिक समाधानों का उपयोग हाल के वर्षों में अधिक व्यवस्थित हुआ है।
Frequently Asked Questions
1. बफर प्याज की सब्सिडी वाली कीमत क्या है?
सरकार द्वारा चुनिंदा शहरों में प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जा रहा है।
2. किन राज्यों में यह योजना लागू है?
वर्तमान में दिल्ली-NCR, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पंजाब और ओडिशा सहित कई राज्यों में यह हस्तक्षेप जारी है।