एक आरटीआई के माध्यम से सामने आए आंकड़ों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें 5.72 करोड़ खातों में शून्य बैलेंस पाया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में निष्क्रिय खातों की संख्या सबसे अधिक है।

  • देश के लगभग 5.72 करोड़ जन-धन खातों में वर्तमान में शून्य बैलेंस है।
  • उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या में जीरो बैलेंस वाले खाते पाए गए हैं।
  • जन-धन योजना के तहत अब तक 59 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY), जिसे वित्तीय समावेशन के एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा गया था, अब एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। हाल ही में सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों ने खुलासा किया है कि देश भर में लगभग 5.72 करोड़ जन-धन खाते पूरी तरह से खाली हैं। यह आंकड़ा योजना की जमीनी सफलता और खातों के निरंतर उपयोग पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि योजना के तहत खोले गए कुल खातों में से हर चौथा खाता या तो निष्क्रिय है या उसमें कोई राशि जमा नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में शून्य शेष राशि वाले खातों की संख्या सबसे अधिक है, जिसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश का स्थान आता है। यह स्थिति दर्शाती है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक बैंकिंग सेवाएं तो पहुंच गई हैं, लेकिन उन्हें सक्रिय रखने के लिए आवश्यक वित्तीय निरंतरता का अभाव है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केवल खाता खोलना वित्तीय समावेशन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। यदि करोड़ों खाते बिना किसी लेनदेन के बंद पड़े हैं, तो इसका अर्थ है कि बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र का एक बड़ा हिस्सा केवल कागजों पर सक्रिय है। यह सरकारी निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों के बीच एक बड़ी खाई को दर्शाता है।

वित्तीय समावेशन का अर्थ केवल बैंक खाता खोलना नहीं, बल्कि उस खाते के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना है।

ऐतिहासिक रूप से, जन-धन योजना का उद्देश्य देश के उन करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था जिनके पास पहले कोई बैंक खाता नहीं था। 12 वर्षों के भीतर 59 करोड़ से अधिक खाते खोलकर सरकार ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है, लेकिन 'जीरो बैलेंस' की यह समस्या इस उपलब्धि की चमक को कम कर देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खातों के निष्क्रिय होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की अक्षमता, बैंकिंग जागरूकता की कमी और डिजिटल लेनदेन के प्रति झिझक शामिल है। यदि इन खातों को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो यह सरकारी संसाधनों की एक बड़ी बर्बादी साबित हो सकती है।

Did You Know?: प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत 2014 में की गई थी और इसका लक्ष्य 'वित्तीय समावेशन' के माध्यम से हर भारतीय को बैंकिंग से जोड़ना था।

Frequently Asked Questions

1. जन-धन योजना के कितने खाते खाली हैं?
आरटीआई के अनुसार, लगभग 5.72 करोड़ जन-धन खातों में शून्य बैलेंस है।

2. किस राज्य में सबसे अधिक जीरो बैलेंस खाते हैं?
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में शून्य शेष राशि वाले खातों की संख्या सर्वाधिक है।