पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भारत के जीडीपी अनुमानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए डेटा की गुणवत्ता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बारे में गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था के आकार में बड़े संशोधनों और डेटा विसंगतियों पर विस्तृत चर्चा की है।
- GDP और अन्य डेटा श्रृंखलाओं के बीच महत्वपूर्ण विसंगतियां पाई गई हैं।
- पूर्व वित्त सचिव ने डेटा की गुणवत्ता और संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त की है।
- आर्थिक विकास की दर को प्रभावित करने के लिए GDP के आंकड़ों में भारी संशोधन किया गया है।
भारत के नवीनतम जीडीपी (GDP) अनुमानों ने आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता, कार्यप्रणाली और डेटा की गुणवत्ता पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने 'द हिंदू' को दिए एक साक्षात्कार में सरकार द्वारा आर्थिक अनुमानों के बचाव और डेटा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गर्ग का तर्क है कि सरकार ने अर्थव्यवस्था के आकार में किए गए बड़े संशोधनों के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है। विशेष रूप से, 2024-25 के लिए जीडीपी में लगभग ₹12.70 लाख करोड़ की कमी देखी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे नई पद्धति और व्यापक कवरेज का हवाला देकर टालने की कोशिश कर रही है, जो कि तर्कसंगत नहीं लगता क्योंकि बेहतर कवरेज से आमतौर पर जीडीपी बढ़ती है, घटती नहीं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि आर्थिक डेटा की विश्वसनीयता कम होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक निवेशकों, रेटिंग एजेंसियों और शेयर बाजार के विश्वास पर पड़ता है। डेटा में विसंगतियां न केवल नीति निर्माण को प्रभावित करती हैं, बल्कि मुद्रा के अवमूल्यन और निवेशकों के नुकसान का कारण भी बन सकती हैं।
जीडीपी के आंकड़ों में यह गिरावट या तो सिस्टम की गलती है या जानबूझकर की गई अतिशयोक्ति, जिसे अब सुधारा जा रहा है।
गर्ग ने यह भी संकेत दिया कि डेटा में इस तरह के संशोधन भविष्य में वास्तविक विकास दर को कृत्रिम रूप से उच्च दिखाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने MoSPI (सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) से मांग की है कि वह 2011-12 से 2021-22 तक के बैक-सीरीज डेटा को पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करे ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'डबल डिफलेशन' पद्धति और मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों में विसंगति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 4% से अधिक है और उत्पादक मूल्य मुद्रास्फीति 9% है, तो जीडीपी डिफलेटर का 2.5% होना सांख्यिकीय रूप से संदिग्ध है।
Frequently Asked Questions
1. सुभाष चंद्र गर्ग ने जीडीपी आंकड़ों पर क्या सवाल उठाए हैं?
उन्होंने जीडीपी और अन्य आर्थिक डेटा श्रृंखलाओं के बीच विसंगति और डेटा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
2. अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में संशोधन क्यों किया जाता है?
आमतौर पर नई कार्यप्रणाली, बेहतर डेटा कवरेज या गणना की गलतियों को सुधारने के लिए संशोधन किए जाते हैं।