आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के एकीकरण पर सवाल उठाते हुए इसे गलत दिशा में उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने लघु वित्त बैंकों (SFBs) को प्रोत्साहित करने की भी मांग की है।
- सी. रंगराजन ने कहा कि RRBs का विलय उनके स्थानीय चरित्र को खत्म कर सकता है।
- उन्होंने लघु वित्त बैंकों (SFBs) की संख्या बढ़ाने के लिए आरबीआई से प्रोत्साहन की मांग की।
- रंगराजन ने चेतावनी दी कि केवल नए संस्थान बनाना ऋण वितरण की समस्याओं का समाधान नहीं है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के हालिया एकीकरण की कड़ी आलोचना की है। चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि बैंकों का यह समेकन उनके स्थानीय और क्षेत्रीय चरित्र को कमजोर कर रहा है, जिससे अंततः उनके सार्वभौमिक बैंकों (Universal Banks) के साथ विलय होने का खतरा है।
रंगराजन ने चिंता व्यक्त की कि RRBs को इस तरह से स्थापित किया गया था कि उनका स्थानीय स्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण को समान रूप से प्रभावी बना सके। हालांकि, सरकार की 'एक राज्य-एक RRB' नीति के तहत, बैंकों की संख्या में भारी कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 2005 में 196 RRBs थे, जो अब घटकर काफी कम रह गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि ग्रामीण बैंकिंग का केंद्रीकरण भारत की वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। यदि ग्रामीण बैंकों का स्थानीय जुड़ाव खत्म होता है, तो अंतिम छोर तक ऋण पहुँचने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
RRBs का विलय उनके स्थानीय स्वरूप को मिटा सकता है, जो ग्रामीण ऋण वितरण के लिए आवश्यक है।
रंगराजन ने लघु वित्त बैंकों (SFBs) के भविष्य पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल 11 SFBs हैं, जो देश की विशाल ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने आरबीआई से आग्रह किया कि वे ऐसे प्रोत्साहन प्रदान करें जिससे नए प्रमोटरों को इन बैंकों की स्थापना के लिए प्रेरित किया जा सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में ऋण वितरण की खाई को पाटने के लिए समय-समय पर विभिन्न संस्थागत प्रयास किए गए हैं। इसमें बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और स्वयं सहायता समूह (SHGs) शामिल हैं।
| विशेषता | क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) | लघु वित्त बैंक (SFB) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | ग्रामीण और क्षेत्रीय विकास | वित्तीय समावेशन और सूक्ष्म ऋण |
| वर्तमान स्थिति | विलय के कारण संख्या में कमी | संख्या बढ़ाने की आवश्यकता |
Frequently Asked Questions
1. सी. रंगराजन ने RRBs के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि RRBs का विलय उनके स्थानीय चरित्र को खत्म कर रहा है, जो एक गलत कदम है।
2. लघु वित्त बैंकों (SFBs) के लिए क्या चुनौती है?
वर्तमान में इनकी संख्या कम है और इनके पास सार्वभौमिक बैंकों के समान ही कठिन शर्तें हैं, जिससे नए बैंकों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन की कमी है।