नई दिल्ली में आयोजित होने वाले पहले iBRICS शिखर सम्मेलन में 500 से अधिक निवेशक और वित्त मंत्री शामिल होंगे, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और गैर-डॉलर भुगतान प्रणालियों पर चर्चा करेंगे।
- नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को iBRICS शिखर सम्मेलन का उद्घाटन होगा।
- 500 से अधिक संस्थानिक निवेशक और वित्त मंत्री भाग लेंगे, जो 1 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं।
- मुख्य चर्चा का विषय गैर-डॉलर निपटान, UPI और Pix जैसे भुगतान प्रणालियों का एकीकरण होगा।
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को ऐतिहासिक iBRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन BRICS शिखर सम्मेलन के इतर आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों और भागीदार देशों के बीच पूंजी के प्रवाह को सुगम बनाना है।
इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में 500 से अधिक संस्थागत निवेशक, वित्त मंत्री और प्रमुख व्यापारिक नेता भाग लेंगे। इस समूह में शामिल संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds), पेंशन फंड और फैमिली ऑफिस मिलकर लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। यह विशाल पूंजी बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और डिजिटल क्षमता परियोजनाओं में निवेश के नए द्वार खोल सकती है।
वित्तीय प्रणालियों का एकीकरण और गैर-डॉलर भुगतान
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख एजेंडा BRICS अर्थव्यवस्थाओं के बीच सीमा पार निवेश और गैर-डॉलर निपटान (Non-dollar settlements) प्रणालियों को मजबूत करना है। वर्तमान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ दबावों के बीच, यह कदम वैश्विक व्यापार की गतिशीलता को बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के UPI और ब्राजील के Pix जैसे राष्ट्रीय फास्ट-पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम होगा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) पर भी गहन चर्चा होने की संभावना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के विखंडन (Fragmentation) के खिलाफ एक रणनीतिक प्रयास है। डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।
iBRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण (Global South) की वित्तीय स्वायत्तता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
भारत की 2026 की अध्यक्षता का विषय "लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" है। यह प्रधानमंत्री के 'मानवता प्रथम' के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो समावेशी विकास पर जोर देता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का विस्तार हाल के वर्षों में हुआ है, जिससे यह दुनिया की एक बड़ी आबादी और जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाला समूह बन गया है। iBRICS जैसे मंचों का उदय इस बात का संकेत है कि अब आर्थिक शक्ति का केंद्र पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
Frequently Asked Questions
1. iBRICS शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य संप्रभु पूंजी को BRICS देशों में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और डिजिटल परियोजनाओं से जोड़ना है।
2. यह सम्मेलन कहाँ आयोजित हो रहा है?
यह सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है।