एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, 58% परिवारों को अपने दिवंगत परिजनों की संपत्ति का हस्तांतरण करने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। डिजिटल इंडिया के दावों के बावजूद, भूमि और संपत्ति कार्यालय भ्रष्टाचार के मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

  • 58% परिवारों ने संपत्ति हस्तांतरण के लिए रिश्वत देने की बात स्वीकार की है।
  • 2022 की तुलना में भ्रष्टाचार के मामलों में वृद्धि देखी गई है (52% से बढ़कर 58%)।
  • संपत्ति पंजीकरण और भूमि कार्यालय रिश्वतखोरी के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं।
  • डिजिटलीकरण के बावजूद, प्रक्रिया अभी भी काफी हद तक भौतिक दस्तावेजों पर निर्भर है।

जब परिवार के किसी सदस्य, विशेष रूप से घर के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु होती है, तो शोक के बाद संपत्ति, बैंक जमा, शेयर और गहनों जैसे महत्वपूर्ण संपत्तियों को वारिसों के नाम करने की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन हालिया LocalCircles के सर्वेक्षण ने एक कड़वी सच्चाई उजागर की है: यह प्रक्रिया अक्सर भ्रष्टाचार के जाल में फंस जाती है। सर्वेक्षण के अनुसार, 58% परिवारों को अपने परिजनों की संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए रिश्वत देनी पड़ी।

यह समस्या केवल एक जगह तक सीमित नहीं है। जहाँ 29% लोगों ने कहा कि उन्हें एक या दो जगहों पर रिश्वत देनी पड़ी, वहीं 29% लोगों ने बताया कि उन्हें 'कई जगहों' पर भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा। यह चौंकाने वाला है क्योंकि सरकारें लगातार प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटलीकरण पर जोर दे रही हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह भ्रष्टाचार केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक पारदर्शिता और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के लिए एक गंभीर खतरा है। जब संपत्ति का हस्तांतरण ही कठिन होगा, तो यह निवेश और पारिवारिक वित्तीय सुरक्षा दोनों को प्रभावित करता है।

संपत्ति हस्तांतरण में व्याप्त यह भ्रष्टाचार दर्शाता है कि केवल तकनीक लाना काफी नहीं है, जब तक कि प्रशासनिक मानसिकता में बदलाव न आए।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि केवल 32% लोगों ने ही संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बताया। दिलचस्प बात यह है कि वसीयत (Will) होने के बावजूद, 16% लोग प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहे, जो यह संकेत देता है कि कानूनी दस्तावेज भी प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में पिछले चार वर्षों में वृद्धि हुई है। 2022 के सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 52% था, जो अब बढ़कर 58% हो गया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि डिजिटलीकरण के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार की गति धीमी है।

भ्रष्टाचार के मुख्य केंद्र

कार्यालय का प्रकाररिश्वत का अनुभव (%)
संपत्ति पंजीकरण/भूमि कार्यालय73%
मैजिस्ट्रेट कार्यालय/न्यायालयविविध
अन्य स्थानीय/राज्य सरकारी कार्यालयविविध

सबसे बड़ा दर्द बिंदु संपत्ति पंजीकरण और भूमि कार्यालय हैं। 73% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें रिश्वत इन्हीं कार्यालयों में देनी पड़ी। इसका मुख्य कारण पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत अभी भी भौतिक उपस्थिति, भौतिक दस्तावेजों और उंगलियों के निशान जैसी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होना है।

Did You Know?: भारत सरकार ने 'ड्राफ्ट रजिस्ट्रेशन बिल, 2025' प्रस्तावित किया है, जो पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह अभी तक कानून नहीं बना है।

Frequently Asked Questions

1. क्या वसीयत होने से संपत्ति का हस्तांतरण आसान हो जाता है?
वसीयत प्रक्रिया को स्पष्ट तो बनाती है, लेकिन सर्वेक्षण के अनुसार, यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जटिलताओं को पूरी तरह समाप्त नहीं करती है।

2. भ्रष्टाचार के मामले बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं?
सर्वेक्षण के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामले बढ़े हैं; 2022 में यह 52% था जो अब 58% हो गया है।