पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका में संभावित ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में लाल निशान पर रहे।
- सेंसेक्स 172.77 अंक गिरकर 76,342.66 पर आया।
- निफ्टी 63.30 अंक की गिरावट के साथ 23,832.60 पर रहा।
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिका-ईरान तनाव मुख्य कारण।
- FIIs ने शुक्रवार को ₹3,111.94 करोड़ की बिकवाली की।
सोमवार (7 सितंबर, 2026) को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। BSE Sensex और NSE Nifty दोनों में गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत हैं। निवेशकों के बीच डर है कि अमेरिका में ब्याज दरें फिर से बढ़ सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी बाहर जा सकती है।
बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका है, जिससे Brent Crude की कीमतें 0.78% बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे के लिए खतरा पैदा करती हैं।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय बाजार वर्तमान में 'डबल व्हामी' (दोहरी मार) का सामना कर रहे हैं। एक तरफ बाहरी भू-राजनीतिक तनाव है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति का डर। जब अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करते हैं, जैसा कि हालिया ₹3,111.94 करोड़ की बिकवाली से स्पष्ट है।
"शुक्रवार की अमेरिकी नौकरियों की रिपोर्ट उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत रही, जिसने ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की चिंताओं को फिर से जीवित कर दिया है।" - हरीसेल्वन राधाकृष्णन, CEO, HST Wealth।
सेक्टर-वार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और सीमेंट शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। Infosys, Tech Mahindra, HCL Tech, Tata Steel, TCS और UltraTech Cement प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल थे। हालांकि, Bharti Airtel और Larsen & Toubro जैसे कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई और बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
आगामी शुक्रवार (11 सितंबर) को अमेरिका के मुद्रास्फीति डेटा (Inflation Data) की घोषणा होनी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा तय करेगा कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है, जिसका सीधा असर वैश्विक जोखिम धारणा और भारतीय बाजारों पर पड़ेगा।
| सूचकांक (Index) | बदलाव (Points) | अंतिम स्तर (Level) |
|---|---|---|
| BSE Sensex | -172.77 | 76,342.66 |
| NSE Nifty | -63.30 | 23,832.60 |
बाजार की यह अस्थिरता दर्शाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हैं। अमेरिका में एक रिपोर्ट या पश्चिम एशिया में एक सैन्य हलचल मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर सीधे प्रभाव डालती है।
1. बाजार गिरने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित वृद्धि शामिल हैं।
2. FIIs का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
विदेशी संस्थागत निवेशक जब बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार में तरलता कम होती है और कीमतों में गिरावट आती है।