गुलाटी संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जीएसटी के दूसरे चरण (GST 2.0) के सुधारों, प्रभावी कर दरों में कमी और राज्यों की राजकोषीय स्थिति पर गहन चर्चा शुरू हुई है।
- जीएसटी 2.0 में प्रभावी कर दर 11.6% से घटकर 9.5% होने का अनुमान है।
- जीएसटी-जीडीपी अनुपात 2022-23 के 6.07% से गिरकर 2025-26 में 5.96% हो गया है।
- सम्मेलन में राज्यों के वित्त और राजकोषीय संघवाद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दूसरे चरण के सुधारों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सोमवार से शुभारंभ हुआ। गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जीएसटी 2.0 के राज्यों के वित्त और राजकोषीय नीति पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना है।
सम्मेलन के उद्घाटन तकनीकी सत्र में, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) की निदेशक आर. कविता राव ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जीएसटी 2.0 के तहत प्रभावी कर दर में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है, जो 11.6% से घटकर 9.5% तक आ सकती है। हालांकि, उन्होंने एक चिंताजनक आंकड़े की ओर भी इशारा किया कि जीएसटी-जीडीपी अनुपात 2022-23 के 6.07% से घटकर 2025-26 में 5.96% रह गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जीएसटी का यह दूसरा चरण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक है। यदि कर दरों में कमी के साथ राजस्व संग्रह में गिरावट जारी रहती है, तो राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और विकास कार्यों के लिए धन जुटाने की क्षमता पर गंभीर संकट आ सकता है। यह सम्मेलन इसी संतुलन को खोजने का एक प्रयास है।
जीएसटी 2.0 का केंद्र केवल कर दरों को कम करना नहीं, बल्कि राज्यों और केंद्र के बीच राजकोषीय संतुलन को फिर से परिभाषित करना है।
सम्मेलन के पहले सत्र की अध्यक्षता पूर्व आईआरएस अधिकारी और आईएमएफ (IMF) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरविन्द मोदी ने की। इस सत्र में सच्चिदानंद मुखर्जी, पूर्व आयकर आयुक्त आर. मोहन, और गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर सेबेस्टियन मॉरिस जैसे दिग्गजों ने जीएसटी 1.0 से 2.0 के संक्रमण काल के दौरान राजस्व उत्पादकता और राजकोषीय संघवाद पर अपने विचार साझा किए।
तकनीकी सत्रों के दौरान 25 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें दर युक्तिकरण (Rate Rationalization), एमएसएमई (MSMEs) पर प्रभाव, डिजिटल प्रशासन, और अनुपालन व्यवहार जैसे विषयों पर गहन मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे जीएसटी के नए ढांचे से औद्योगिक विविधता और राज्य सरकारों के बजट पर असर पड़ेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में जीएसटी को 2017 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य 'एक राष्ट्र, एक कर' की अवधारणा को साकार करना था। पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने कर चोरी रोकने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई सुधार किए हैं, लेकिन अब 'जीएसटी 2.0' के माध्यम से दरों के सरलीकरण और राज्यों के राजस्व घाटे को कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Frequently Asked Questions
1. जीएसटी 2.0 क्या है?
जीएसटी 2.0 जीएसटी प्रणाली का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य कर दरों को सरल बनाना, अनुपालन बढ़ाना और राज्यों के वित्त को मजबूती प्रदान करना है।
2. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य जीएसटी सुधारों के आर्थिक प्रभावों, विशेष रूप से राज्यों की वित्तीय स्थिति और राजकोषीय नीति पर इसके असर का विश्लेषण करना है।