क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम में आई भारी गिरावट और बढ़ती अस्थिरता के बाद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अब डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट तरीके में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
- सेबी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस निर्धारण की समीक्षा कर रहा है।
- CAS और डेरिवेटिव ट्रेडिंग के समापन समय के बीच 10 मिनट का अंतर मुख्य चिंता का विषय है।
- संस्थागत निवेशक, जो टर्नओवर का 60-65% हिस्सा हैं, जोखिम से बचने के लिए बाजार से दूर हो रहे हैं।
- अगस्त में NSE का डेरिवेटिव टर्नओवर नवंबर 2023 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए सेटलमेंट कीमतों के निर्धारण की पद्धति में बदलाव करने का संकेत दिया है। यह कदम क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के कार्यान्वयन के बाद पैदा हुई अस्थिरता और बाजार भागीदारों की शिकायतों के जवाब में उठाया गया है।
समस्या की मुख्य जड़ समय का अंतर है। वर्तमान में, CAS में ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे समाप्त हो जाती है, जबकि डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग 10 मिनट और अधिक चलती है। म्यूचुअल फंड, विदेशी निवेशकों और एल्गोरिथम ट्रेडर्स जैसे संस्थागत निवेशकों के लिए यह 10 मिनट का अंतराल एक बड़ा जोखिम पैदा करता है, क्योंकि वे कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बीच अपने हेजिंग (Hedging) को संतुलित नहीं कर पाते।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान व्यवस्था ने आर्बिट्रेज और हेजिंग के लिए आवश्यक संतुलन को बिगाड़ दिया है। जब कैश मार्केट (CAS) पहले बंद हो जाता है, तो ट्रेडर्स के पास अपनी होल्डिंग्स को समायोजित करने का मौका नहीं रहता, जिससे उन्हें डेरिवेटिव मार्केट के उतार-चढ़ाव का सीधा सामना करना पड़ता है। इसी डर से बड़े खिलाड़ी निफ्टी 50 और सेंसेक्स की एक्सपायरी के दिनों में बाजार से दूर रह रहे हैं।
सत्र के समय में विसंगति ने मूल्य खोज (Price Discovery) के उपकरण को संस्थागत हेजर्स के लिए प्रणालीगत अस्थिरता के स्रोत में बदल दिया है।
आंकड़े इस गिरावट की पुष्टि करते हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के अनुसार, अगस्त में कुल डेरिवेटिव टर्नओवर ₹34.48 लाख करोड़ रहा, जो नवंबर 2023 के बाद सबसे कम है। आनंद राठी वेल्थ की श्वेता रजनी के अनुसार, ऑप्शंस टर्नओवर में 20% की मासिक गिरावट CAS के लागू होने का सीधा परिणाम है।
बाजार विशेषज्ञ अब मांग कर रहे हैं कि CAS और डेरिवेटिव सत्र के समापन समय को एक समान किया जाए और एक्सपायरी के दिनों में सेटलमेंट कीमतों को CAS से अलग रखा जाए। कई विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुराने वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) सिस्टम को वापस लाया जाए ताकि कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।
| विशेषता | CAS से पहले | वर्तमान CAS सिस्टम |
|---|---|---|
| समापन समय | समान (कैश और डेरिवेटिव) | 10 मिनट का अंतर |
| सेटलमेंट आधार | VWAP (वॉल्यूम वेटेड) | CAS क्लोजिंग प्राइस |
| अस्थिरता | कम/अनुमानित | अधिक (कम वॉल्यूम के कारण) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: संस्थागत निवेशक CAS से क्यों बच रहे हैं?
क्योंकि कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बंद होने के समय में 10 मिनट का अंतर है, जिससे वे रीयल-टाइम में हेजिंग नहीं कर पाते।
प्रश्न 2: एक्सपायरी के दिनों के लिए क्या समाधान सुझाया गया है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अत्यधिक अस्थिरता को कम करने के लिए CAS प्राइस के बजाय पारंपरिक VWAP पद्धति का उपयोग किया जाए।