एल नीनो के प्रभाव और बारिश में 45% की कमी के कारण विजयनगरम जिले में धान की खेती में भारी गिरावट आई है। सिंचाई के लिए नहरें सूख गई हैं और किसान अब कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
- विजयनगरम में धान का रकबा 1,00,251 हेक्टेयर से गिरकर केवल 20,760 हेक्टेयर रह गया है।
- मानसून की बारिश में 45% की भारी कमी दर्ज की गई है।
- थोटापल्ली जलाशय से पानी न छोड़े जाने के कारण नहरें पूरी तरह सूख चुकी हैं।
- किसान अब कम पानी वाली वाणिज्यिक फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी जा रही है।
आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में एल नीनो (El Niño) के प्रभाव ने कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। इस खरीफ सीजन में, जिले के किसान एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं, जहाँ धान की खेती का क्षेत्रफल सामान्यतः होने वाले 1 लाख हेक्टेयर से घटकर मात्र 20,760 हेक्टेयर रह गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में हुई 45% कम बारिश के कारण हुई है।
सूखा और सिंचाई का संकट
कृषि संकट केवल कम बारिश तक ही सीमित नहीं है। थोटापल्ली जलाशय (Thotapalli reservoir) से पानी जारी न किए जाने के कारण चीपुरुपल्ली मंडल की नहरें पूरी तरह सूख गई हैं। इससे उन किसानों की स्थिति और भी खराब हो गई है जो पूरी तरह से सिंचाई पर निर्भर हैं। भूजल स्तर में गिरावट और नदियों से पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विजयनगरम कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वी.टी. रामाराव के अनुसार, जिले को सामान्यतः 455.9 मिमी बारिश मिलनी चाहिए थी, लेकिन केवल 286.2 मिमी ही प्राप्त हुई है।
विजयनगरम के 27 मंडलों में से 24 मंडलों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। भोगपुरम, पुसापतिरेगा, नेल्लिमर्ला और गुरला जैसे क्षेत्रों में खेत अब बंजर भूमि की तरह दिखाई दे रहे हैं। मक्का, गन्ना और दलहन जैसी फसलों के रकबे में भी लगभग 50% की गिरावट देखी गई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह संकट केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के बदलते पैटर्न के प्रति भारतीय कृषि की संवेदनशीलता को दर्शाता है। जब धान जैसी मुख्य फसल का रकबा इतनी तेजी से गिरता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय खाद्य सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और जलवायु प्रभाव
एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के गर्म होने से जुड़ी है, जिसका सीधा असर दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के मानसून पर पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से, एल नीनो के वर्षों में भारत में सूखे की स्थिति देखी गई है, जिससे कृषि उत्पादन में अनिश्चितता पैदा होती है।
| विवरण | सामान्य स्थिति | वर्तमान स्थिति (2026) |
|---|---|---|
| धान का रकबा (हेक्टेयर) | 1,00,251 | 20,760 |
| औसत वर्षा (मिमी) | 455.9 | 286.2 |
| वर्षा में कमी (%) | 0% | ~45% |
Frequently Asked Questions
1. विजयनगरम में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों हुआ?
एल नीनो के कारण मानसून की बारिश में 45% की कमी और सिंचाई के लिए थोटापल्ली जलाशय से पानी न मिलने के कारण।
2. कृषि विभाग ने किसानों को क्या सलाह दी है?
संयुक्त निदेशक ने किसानों को ऐसी वाणिज्यिक फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी है जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है और जो जल्दी तैयार हो जाती हैं।