गुजरात सरकार ने पशु और पोल्ट्री आहार के निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त विधेयक पेश किया है। मिलावट के कारण पशुओं की मृत्यु होने पर दोषियों को 10 साल तक की जेल हो सकती है।
- मिलावटी पशु आहार बनाने पर 1 साल से 10 साल तक की जेल का प्रावधान।
- पशुओं की मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
- पशुपालन क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस अनिवार्य होगा।
- यह कानून किसानों द्वारा स्वयं बनाए गए आहार पर लागू नहीं होगा।
गुजरात सरकार ने राज्य में पशु आहार, पोल्ट्री फीड और खनिज मिश्रण (mineral mixture) के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री को विनियमित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य लक्ष्य पशुपालन क्षेत्र में बढ़ते मिलावटखोरी के खतरे को रोकना और किसानों के हितों की रक्षा करना है।
इस विधेयक की सबसे कठोर बात इसकी दंड व्यवस्था है। यदि कोई निर्माता मिलावटी पशु आहार बनाता है और उससे पशु की मृत्यु नहीं होती है, तो उसे एक वर्ष की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। हालांकि, यदि मिलावटी उत्पाद के कारण पशु या पोल्ट्री की मृत्यु हो जाती है, तो अपराधी को 7 से 10 साल तक की कठोर कारावास और 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भुगतना होगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि गुजरात में पशुधन की संख्या अत्यधिक है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में, राज्य में इन उत्पादों की गुणवत्ता के लिए कोई केंद्रीय नियामक तंत्र नहीं है। यह विधेयक न केवल गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा, बल्कि अवैध रूप से प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स के उपयोग पर भी लगाम लगाएगा, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और निर्यात क्षमता में सुधार होगा।
मिलावटखोरी के खिलाफ यह सख्त रुख न केवल किसानों का भरोसा बहाल करेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय पशु उत्पादों की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।
गुजरात के पास पशुधन के विशाल संसाधन हैं, जिसमें 96.34 लाख मवेशी, 105.43 लाख भैंसें (देश में तीसरे स्थान पर), और 217.73 लाख पोल्ट्री जानवर शामिल हैं। कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने स्पष्ट किया कि इस कानून का उद्देश्य गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और मिसलेबलिंग (गलत लेबलिंग) जैसी धोखाधड़ी को रोकना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पशुपालन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन गुणवत्ता नियंत्रण के अभाव में मिलावटी आहार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। गुजरात का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है, जो पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या यह कानून व्यक्तिगत किसानों पर लागू होगा?
नहीं, यह कानून उन किसानों पर लागू नहीं होगा जो अपने स्वयं के पशुओं के लिए स्वयं आहार तैयार करते हैं।
2. लाइसेंसिंग का अधिकार किसके पास होगा?
पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक या सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी के पास लाइसेंस जारी करने का अधिकार होगा।