जयपुर की 'श्री हलवाई समिति' ने जोमैटो के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्लेटफॉर्म का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया है। व्यापारियों ने भारी कमीशन, पारदर्शिता की कमी और जबरन डिस्काउंट जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई है।

  • जयपुर की 60 प्रमुख मिठाई दुकानों और रेस्टोरेंट्स ने जोमैटो का बहिष्कार किया।
  • कमीशन दरों का 0% से बढ़कर 12% से 25% तक होना मुख्य विवाद का कारण है।
  • व्यापारियों ने बिना सूचना के डिस्काउंट देने और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर FSNM ने भी जोमैटो से जवाब मांगा है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य वितरण क्षेत्र में एक बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। शहर की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई दुकानों के संगठन, श्री हलवाई समिति ने जोमैटो (Zomato) के खिलाफ 'अनिश्चितकालीन बहिष्कार' की घोषणा की है। समिति का आरोप है कि जोमैटो की व्यावसायिक प्रथाएं अब व्यापारियों के लिए "वित्तीय रूप से अव्यवहारिक" (financially unviable) हो गई हैं।

इस बहिष्कार में जयपुर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध प्रतिष्ठान जैसे लक्ष्मी मिष्ठान भंडार (LMB), रावत मिष्ठान भंडार (RMB), बॉम्बे मिष्ठान भंडार और دود मिष्ठान भंडार शामिल हैं। LMB के प्रोप्राइटर अजय अग्रवाल ने बताया कि जब 2015-16 में जोमैटो की शुरुआत हुई थी, तब वे केवल एक लॉजिस्टिक पार्टनर थे और कमीशन शून्य था। लेकिन अब यह कमीशन 10-12% से बढ़कर 25% तक पहुंच गया है, जो छोटे और मध्यम व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not just a local dispute but a symptom of a larger conflict between traditional brick-and-mortar legacies and the aggressive algorithms of Big Tech. When heritage brands established in the 18th century clash with 21st-century delivery giants, it highlights the struggle to maintain profit margins in a highly price-sensitive market like sweets, where ingredients costs are rising but consumer price elasticity is low.

समिति के सदस्यों का कहना है कि जोमैटो न केवल भारी कमीशन वसूल रहा है, बल्कि उन पर विज्ञापन के लिए दबाव भी बनाया जाता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि प्लेटफॉर्म बिना दुकानदारों को सूचित किए ग्राहकों को डिस्काउंट दे देता है, और बाद में दुकानदारों को ही उस घाटे को वहन करना पड़ता है।

"यदि प्रतिष्ठित व्यवसायी अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा वे अपने सबसे विश्वसनीय पार्टनर्स को खो देंगे।"

इस विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर का रूप ले लिया है। नेशनल फेडरेशन ऑफ स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चरर्स (FSNM) ने भी जोमैटो को पत्र लिखकर बैठक की मांग की है। FSNM के महानिदेशक फिरोज नकवी ने संकेत दिया कि बेंगलुरु के बाद अब जयपुर में हो रहे विरोध प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि यह समस्या पूरे देश में फैल रही है।

व्यापारियों की मांग है कि मिठाई श्रेणी के लिए एक समान और तर्कसंगत कमीशन दर तय की जाए। उनका तर्क है कि मिठाई का बाजार अन्य खाद्य पदार्थों से अलग है और यहाँ प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है।

क्या आप जानते हैं?: लक्ष्मी मिष्ठान भंडार (LMB) का इतिहास जयपुर शहर की स्थापना के समय (1727) से जुड़ा हुआ है, जो इसे भारत के सबसे पुराने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में से एक बनाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जयपुर की मिठाई दुकानों ने जोमैटो का बहिष्कार क्यों किया?
उत्तर: मुख्य कारण अत्यधिक कमीशन (25% तक), पारदर्शिता की कमी और बिना सहमति के दिए जाने वाले डिस्काउंट्स हैं।

प्रश्न 2: इस बहिष्कार का ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: ग्राहक अब इन प्रसिद्ध दुकानों से जोमैटो के माध्यम से ऑर्डर नहीं कर पाएंगे, उन्हें या तो सीधे दुकान जाना होगा या अन्य माध्यमों का उपयोग करना होगा।