भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को मंजूरी दे दी है। यह आईपीओ लगभग ₹30,000 करोड़ का हो सकता है, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े इश्यू में से एक होगा।
- SEBI ने NSE के आईपीओ प्रस्ताव पर अपनी अंतिम टिप्पणियां जारी कर दी हैं।
- इस आईपीओ का आकार लगभग ₹30,000 करोड़ होने का अनुमान है।
- यह पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
- NSE का बाजार मूल्यांकन ₹5 लाख करोड़ से अधिक होने की संभावना है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय बाजार नियामक SEBI ने अंततः NSE के लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ (IPO) के लिए हरी झंडी दे दी है। लगभग एक दशक के नियामक विलंब के बाद, देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
4 सितंबर को मिली सेबी की अंतिम टिप्पणियों के बाद, अब NSE अपने आईपीओ लॉन्च करने के अगले चरणों की ओर बढ़ सकता है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, इस प्रस्तावित आईपीओ का मूल्य लगभग ₹30,000 करोड़ हो सकता है। यदि यह सफल रहता है, तो यह अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक बन जाएगा।
क्या है इस आईपीओ की योजना?
यह आईपीओ पूरी तरह से 14.89 करोड़ शेयरों का 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपनी लगभग 6% हिस्सेदारी बेचेंगे और इस बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि सीधे एक्सचेंज को नहीं, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी। प्रमुख विक्रेताओं में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेच सकता है, जबकि MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयर बेचेगा।
NSE का बाजार मूल्यांकन ₹5 लाख करोड़ के पार जा सकता है, जो इसे भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों की श्रेणी में खड़ा कर देगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और देरी के कारण
NSE की लिस्टिंग की योजना 2016 से ही नियामक जांच और कानूनी मुद्दों के कारण अटकी हुई थी। को-लोकेशन और डार्क-फाइबर सुविधाओं से संबंधित जांचों ने इस प्रक्रिया को काफी धीमा कर दिया था। हालांकि, हाल ही में सेबी के साथ पुराने मामलों के निपटारे ने इस बड़ी बाधा को हटा दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि NSE का आईपीओ न केवल बाजार में तरलता (liquidity) लाएगा, बल्कि यह भारतीय वित्तीय बुनियादी ढांचे की मजबूती का भी प्रमाण है। NSE वर्तमान में डेरिवेटिव्स बाजार में दुनिया का सबसे सक्रिय एक्सचेंज है और निफ्टी 50 जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का संचालन करता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या NSE इस आईपीओ से पैसा जुटाएगा?
नहीं, यह पूरी तरह से एक 'ऑफर फॉर सेल' है, जिसका अर्थ है कि पैसा मौजूदा शेयरधारकों को जाएगा, कंपनी को नहीं।
2. NSE का मुकाबला किससे है?
NSE का मुख्य प्रतिद्वंद्वी BSE है, जो 2017 में सूचीबद्ध हुआ था और जिसके शेयरों में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।