तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने उर्वरक वितरण के लिए ऐप-आधारित प्रणाली को हटाने की मांगों को खारिज कर दिया है, उन्होंने इसे कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य बताया है।

  • तेलंगाना सरकार खाद की जमाखोरी और डायवर्जन रोकने के लिए ऐप-आधारित प्रणाली जारी रखेगी।
  • राज्य ने 2 सितंबर, 2026 से केंद्र सरकार के 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' (FFS) ऐप को अपनाया है।
  • वर्तमान सरकार के कार्यकाल में तेलंगाना में उर्वरक स्टॉक बढ़कर 22-23 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

कृषि रसद के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने उर्वरक वितरण के लिए ऐप-आधारित प्रणाली को समाप्त करने की संभावना से इनकार कर दिया है। बुधवार को विधान परिषद के सदस्यों को जवाब देते हुए, मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह डिजिटल ढांचा यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि यूरिया और अन्य सब्सिडी वाले उर्वरक वास्तविक किसानों तक आवश्यक मात्रा में और पारदर्शी तरीके से पहुंचें।

मंत्री ने स्वीकार किया कि इस प्रणाली के कार्यान्वयन में कुछ तकनीकी समस्याएं आई हैं—विशेष रूप से बटाईदार किसानों और सहकारी समितियों के लिए परिवहन शुल्क से संबंधित मुद्दे—लेकिन सरकार का ध्यान प्रणाली को छोड़ने के बजाय उसे सरल और अधिक कुशल बनाने पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार प्रमाणीकरण से ऐप-आधारित प्रणाली की ओर बदलाव एक रणनीतिक आवश्यकता थी ताकि उर्वरकों की डायवर्जन, जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) ऐप की ओर संक्रमण भारतीय कृषि में केंद्रीकृत डिजिटल शासन की ओर एक बड़ा बदलाव है। राज्य स्तरीय पहलों को केंद्र सरकार के ढांचे के साथ एकीकृत करके, तेलंगाना सब्सिडी वाले इनपुट के लिए एक अचूक ऑडिट ट्रेल बनाने की कोशिश कर रहा है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उर्वरक सब्सिडी सरकारी खजाने पर एक बड़ा खर्च है; इसमें कोई भी गड़बड़ी सीधे राष्ट्रीय बजट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उत्पादकता को प्रभावित करती है।

उर्वरक वितरण में डिजिटल पारदर्शिता ही कालाबाजारी करने वालों के गठजोड़ को तोड़ने और जमीनी स्तर पर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र टिकाऊ तरीका है।

मंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख किया: अब तक 50 लाख से अधिक किसानों ने ऐप के माध्यम से उर्वरक खरीदे हैं। सिस्टम की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, FFS तकनीकी टीम नियमित लोड टेस्टिंग कर रही है और सर्वर क्षमता को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि पीक डिमांड (जैसे रबी और खरीफ सीजन) के दौरान यह स्वचालित रूप से बढ़ सके।

आपूर्ति संबंधी चिंताओं पर, श्री तुम्मला ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में तेलंगाना में यूरिया की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि हालांकि पश्चिम एशिया में संघर्ष और अस्थिरता के कारण पिछले वर्षों में आयात में देरी हुई थी, लेकिन राज्य ने अपने भंडार को मजबूत किया है। वर्तमान सरकार के आने के बाद स्टॉक 16-17 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 22-23 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

पैरामीटर पिछली व्यवस्था/प्रशासन वर्तमान प्रणाली (FFS ऐप)
उर्वरक स्टॉक 16-17 लाख मीट्रिक टन 22-23 लाख मीट्रिक टन
प्रमाणीकरण आधार-आधारित डिजिटल ऐप-आधारित (FFS)
मुख्य उद्देश्य बुनियादी वितरण कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक

कड़ी निगरानी बनाए रखने के लिए, जिला अधिकारियों को उर्वरक स्टॉक का भौतिक निरीक्षण करने और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करने का निर्देश दिया गया है। डिजिटल प्रणाली में जानबूझकर गड़बड़ी करने वाले रिटेल आउटलेट्स और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या आप जानते हैं?: केंद्र सरकार ने 4 जून, 2026 को FFS ऐप लॉन्च किया था ताकि पूरे भारत में सभी सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री को मानकीकृत किया जा सके और आपूर्ति में क्षेत्रीय विसंगतियों को कम किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या बटाईदार किसानों को ऐप के माध्यम से बुकिंग में समस्या होगी?
मंत्री ने परिषद को आश्वासन दिया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे कि बटाईदार किसानों को बुकिंग प्रक्रिया में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।

प्रश्न 2: तेलंगाना में यूरिया की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति क्या है?
वर्तमान में यूरिया की कोई कमी नहीं है, और स्टॉक बढ़कर 22-23 लाख मीट्रिक टन हो गया है।