कैम्पको (CAMPCO) के अध्यक्ष एस.आर. सतीशचंद्र ने केंद्र सरकार से सुपारी पर एक समान राष्ट्रीय कर लागू करने और आयात की निगरानी कड़ी करने की अपील की है ताकि घरेलू किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
- कैम्पको ने मंडी टैक्स और APMC उपकर को हटाकर 'एक राष्ट्र, एक कर' लागू करने की मांग की।
- घरेलू सुपारी में आयातित सुपारी की मिलावट से बाजार की कीमतों पर बुरा असर पड़ रहा है।
- जनवरी 2027 में मंगलुरु में सुपारी और मानव स्वास्थ्य पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
सेंट्रल अरेकानट एंड कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग को-ऑपरेटिव लिमिटेड (CAMPCO) ने गुरुवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सुपारी पर 'एक राष्ट्र, एक कर' का सिद्धांत लागू किया जाए। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को सुरक्षित करना और अंतर-राज्यीय व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करना है।
कर्नाटक और केरल के इस अंतर-राज्यीय सहकारी संस्थान के अध्यक्ष एस.आर. सतीशचंद्र ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुपारी लेनदेन पर लगाए गए मंडी टैक्स ने अंतर-राज्यीय व्यापार की लागत बढ़ा दी है। उन्होंने मांग की कि कर्नाटक सरकार को भी सुपारी पर APMC उपकर (cess) खत्म करना चाहिए ताकि पूरे देश में इस उत्पाद के लिए केवल एक ही टैक्स हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, सुपारी क्षेत्र वर्तमान में दोतरफा दबाव में है—एक तरफ राज्यों के अलग-अलग टैक्स और दूसरी तरफ अनियंत्रित आयात। जब अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स होते हैं, तो इससे व्यापार की लागत बढ़ती है और इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ता है। एक एकीकृत कर प्रणाली से बाजार में पारदर्शिता आएगी और कीमतों का निर्धारण सही ढंग से हो सकेगा।
कैम्पको अधिकारियों ने इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की है और मंडी टैक्स को समाप्त करने की अपील की है। सतीशचंद्र ने कहा कि कैम्पको घरेलू उत्पादकों के लिए एक निष्पक्ष और स्थिर बाजार सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत उपायों पर जोर देना जारी रखेगा।
सुपारी जैसे कृषि उत्पादों पर एकीकृत कर ढांचे की कमी बाजार में विखंडन पैदा करती है, जिससे बिचौलियों को लाभ होता है और वास्तविक किसानों का मुनाफा कम हो जाता है।
टैक्स के अलावा, आयातित सुपारी के बढ़ते प्रवाह ने भी चिंता बढ़ा दी है। अध्यक्ष ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या आयातित सुपारी को घरेलू उत्पाद के साथ मिलाकर बेचना है। इससे न केवल उत्पाद की ट्रेसिबिलिटी (traceability) प्रभावित होती है, बल्कि घरेलू कीमतों पर भी भारी दबाव पड़ता है।
इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली में हुई बैठक में भी यह मामला उठाया गया। सहकारी संस्था ने आयात नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और गलत वर्गीकरण को रोकने के लिए समन्वित उपायों की मांग की है।
भविष्य की योजनाओं की बात करें तो, कैम्पको 16 जनवरी, 2027 से मंगलुरु के होटल ओशन पर्ल में सुपारी पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता, विशेषज्ञ और उत्पादक हिस्सा लेंगे, जहाँ वैज्ञानिक विकास और मूल्य संवर्धन (value addition) पर चर्चा होगी। विशेष रूप से, सुपारी के सेवन के खिलाफ चल रहे नकारात्मक अभियानों को देखते हुए 'सुपारी और मानव स्वास्थ्य' विषय पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कराधान के संबंध में कैम्पको की मुख्य मांग क्या है?
कैम्पको चाहता है कि केंद्र सरकार सुपारी के लिए एक एकल राष्ट्रीय कर लागू करे और राज्यों के मंडी टैक्स और APMC उपकर को समाप्त करे।
प्रश्न 2: आयातित सुपारी स्थानीय किसानों को कैसे प्रभावित करती है?
जब आयातित सुपारी को स्थानीय उत्पाद बताकर मिलाया जाता है, तो इससे बाजार में कीमतों में गिरावट आती है और स्थानीय किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।