एसबीआई के पूर्व प्रमुख ओ पी भट्ट ने आंतरिक ऑडिट में अनियमितताओं और पुनर्नियुक्ति के लिए शेयरधारकों के समर्थन की कमी के बाद कोफोर्ज लिमिटेड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है।

  • ओ पी भट्ट ने तत्काल प्रभाव से कोफोर्ज लिमिटेड के चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक के पद से इस्तीफा दिया।
  • आंतरिक ऑडिट में बोर्ड मूल्यांकन रिपोर्ट (BER) के प्रस्तुतीकरण में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का मामला सामने आया।
  • एडवेंट फंड्स सहित बड़े शेयरधारकों ने उनकी पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया।

आईटी सेवाओं की दिग्गज कंपनी कोफोर्ज लिमिटेड में एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। पूर्व एसबीआई चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कंपनी के आंतरिक ऑडिट और शेयरधारकों के बीच उनके नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे।

विवाद की मुख्य जड़ कंपनी का 'बोर्ड मूल्यांकन अभ्यास' (Board Evaluation Exercise) है। कोफोर्ज के अनुसार, दूसरी तिमाही के आंतरिक ऑडिट में यह पाया गया कि बोर्ड मूल्यांकन रिपोर्ट को बोर्ड के सामने पेश करते समय कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी। विशेष रूप से, चेयरमैन के स्वयं के प्रदर्शन से संबंधित डेटा को पूरी तरह से उजागर नहीं किया गया था, जिससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े हो गए।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि पारदर्शिता का गंभीर संकट है। जब बोर्ड का प्रमुख ही उस रिपोर्ट को फिल्टर करने का आरोपी हो जो नेतृत्व के मूल्यांकन के लिए बनाई गई है, तो यह निवेशकों के भरोसे को हिला देता है। यह इस्तीफा दर्शाता है कि अब कंपनियां केवल नाम बड़े व्यक्तित्वों के भरोसे नहीं, बल्कि सख्त जवाबदेही के आधार पर चल रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक और बड़ा कारण शेयरधारकों का विरोध है। 24 अगस्त को हुई 34वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में भट्ट की पुनर्नियुक्ति के लिए आवश्यक 75% वोट नहीं मिल सके। आंकड़ों के अनुसार, केवल 65.47% वोट उनके पक्ष में थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सार्वजनिक शेयरधारकों (Public Shareholders) ने लगभग 99.9% वोट उनके खिलाफ डाले।

जब किसी सार्वजनिक कंपनी में शेयरधारकों का जनादेश खत्म हो जाता है और ऑडिट में खामियां निकलती हैं, तो निदेशक का पद पर बने रहना लगभग असंभव हो जाता है।

निजी इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल, जिसकी कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, ने भी भट्ट की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया। विश्लेषकों का मानना है कि ऑडिट की रिपोर्ट और शेयरधारकों की नाराजगी ने मिलकर भट्ट के लिए कंपनी में बने रहना मुश्किल कर दिया था।

अपने इस्तीफे के ईमेल में, ओ पी भट्ट ने दावा किया कि उन्होंने "नेक नीयती" (good faith) से काम किया और अपनी जिम्मेदारियों को स्वतंत्र रूप से निभाया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच बोर्ड में बने रहना कंपनी के कामकाज के लिए सही नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में शेयरधारकों द्वारा किए गए विरोध का कोई जिक्र नहीं किया।

क्या आप जानते हैं?: कोफोर्ज को पहले NIIT टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, जिसने बाद में अपनी वैश्विक पहचान बदलने के लिए रीब्रांडिंग की।
कारक आंतरिक ऑडिट का निष्कर्ष शेयरधारकों का मतदान परिणाम
मुख्य मुद्दा प्रदर्शन डेटा का गैर-प्रकटीकरण बहुमत का अभाव (65.47%)
प्रभाव BER की सत्यता पर सवाल 2027 के बाद पुनर्नियुक्ति रुकी
मुख्य विरोध आंतरिक ऑडिट टीम सार्वजनिक शेयरधारक और एडवेंट फंड्स

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: ओ पी भट्ट ने कोफोर्ज से इस्तीफा क्यों दिया?
उन्होंने आंतरिक ऑडिट में बोर्ड मूल्यांकन रिपोर्ट की हैंडलिंग पर उठे सवालों और पुनर्नियुक्ति के लिए पर्याप्त शेयरधारक वोट न मिलने के कारण इस्तीफा दिया।

प्रश्न 2: किस बड़े शेयरधारक ने उनके खिलाफ वोट किया?
एडवेंट इंटरनेशनल (AI Altius Parent के माध्यम से) उन प्रमुख संस्थागत निवेशकों में से एक था जिसने उनके कार्यकाल के विस्तार का विरोध किया।