अर्थशास्त्री शंकर अय्यर का तर्क है कि भारत को केवल 'अच्छी' ग्रोथ से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि जापान और चीन की तरह 10% से अधिक की निरंतर वृद्धि दर हासिल करनी चाहिए ताकि प्रति व्यक्ति आय में क्रांतिकारी बदलाव आ सके।
- भारत को गरीबी से पूरी तरह बाहर निकलने और उच्च-आय वाले देशों की श्रेणी में आने के लिए निरंतर 10% विकास दर की आवश्यकता है।
- जापान, दक्षिण कोरिया और चीन ने दशकों तक डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल कर अपनी प्रति व्यक्ति आय को सैकड़ों गुना बढ़ाया।
- भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और कम साक्षरता दर (81%) है।
- कौशल विकास और मानव बुनियादी ढांचे में निवेश ही 'विकसित भारत' का एकमात्र रास्ता है।
भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसकी औसत वृद्धि दर महामारी के बाद लगभग 8% रही है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जो सराहनीय है। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? वरिष्ठ अर्थशास्त्री शंकर अय्यर का मानना है कि वास्तविक समृद्धि तब आती है जब विकास दर केवल 'अच्छी' नहीं, बल्कि 'आक्रामक' हो।
ऐतिहासिक सबक: ईस्ट एशियाई चमत्कार
इतिहास गवाह है कि जिन देशों ने गरीबी को मात दी, उन्होंने अल्पकालिक उछाल के बजाय दीर्घकालिक गति (momentum) पर ध्यान दिया। 1960 के दशक में दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति आय केन्या से भी कम थी। हालांकि, 1966 से 1999 के बीच कोरिया ने 16 वर्षों तक 10% से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखी। इसका परिणाम यह हुआ कि उसकी प्रति व्यक्ति आय $134 से बढ़कर आज $36,227 हो गई है।
इसी तरह, चीन ने 1978 और 2010 के बीच 16 अलग-अलग वर्षों में 10% से अधिक की वृद्धि दर्ज की। तुलनात्मक रूप से, 1991 में भारत और चीन की प्रति व्यक्ति आय लगभग समान ($305 बनाम $334) थी, लेकिन आज चीन की आय ($13,862) भारत ($2,810) से कहीं अधिक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत एक 'जीवंत विरोधाभास' (live paradox) है। एक तरफ हमारी GDP दुनिया में छठे स्थान पर है, लेकिन दूसरी तरफ हमारी प्रति व्यक्ति आय अभी भी कंबोडिया और केन्या जैसे छोटे देशों के करीब है। यह अंतर तब तक नहीं भरेगा जब तक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा कृषि (जो केवल 16% राष्ट्रीय आय देता है) से निकलकर उच्च-मूल्य वाले उद्योगों में नहीं जाता।
"मानव कल्याण के लिए विकास दर के सवाल इतने महत्वपूर्ण हैं कि एक बार इनके बारे में सोचने के बाद, किसी और चीज़ के बारे में सोचना कठिन हो जाता है।" - रॉबर्ट लुकास, नोबेल पुरस्कार विजेता।
संरचनात्मक सुधार और साक्षरता की चुनौती
विकास केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह मानव बुनियादी ढांचे पर निर्भर करता है। भारत की साक्षरता दर 81% है, जो वैश्विक औसत (88%) से कम है। इंडोनेशिया और चीन ने अपनी साक्षरता दर को 95% से ऊपर ले जाकर अपने किसानों को कारखानों के लिए तैयार किया। भारत में आज भी 8.7 करोड़ युवा NEET (न शिक्षा, न रोजगार, न प्रशिक्षण) की श्रेणी में हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
| देश | रणनीति | परिणाम |
|---|---|---|
| जापान | भूमि सुधार और MITI का गठन | तीव्र औद्योगिक विकास |
| दक्षिण कोरिया | भारी उद्योग और निर्यात क्रेडिट | प्रति व्यक्ति आय में 228 गुना वृद्धि |
| भारत | सेवा क्षेत्र पर आधारित विकास | उच्च GDP लेकिन निम्न प्रति व्यक्ति आय |
Frequently Asked Questions
1. भारत के लिए 10% ग्रोथ क्यों जरूरी है?
क्योंकि केवल 7-8% ग्रोथ से प्रति व्यक्ति आय में वह क्रांतिकारी वृद्धि नहीं होगी जो भारत को निम्न-मध्यम आय वर्ग से निकालकर विकसित राष्ट्र बना सके।
2. NEET युवाओं का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?
NEET (Not in Education, Employment, or Training) युवाओं की बड़ी संख्या जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) को जनसांख्यिकीय आपदा में बदल सकती है।