केंद्र द्वारा CMR डिलीवरी की समय सीमा बढ़ाने से पंजाब की राइस मिलों में गंभीर संकट पैदा हो गया है, जहाँ पुराने स्टॉक के कारण नई फसल के लिए जगह नहीं बची है।

  • केंद्र ने 2025-26 की फसल के लिए कस्टम मिल्ड राइस (CMR) डिलीवरी की समय सीमा 30 नवंबर, 2026 तक बढ़ाई।
  • पंजाब की 5,200 राइस मिलों में से लगभग 80% के पास पिछले सीजन का धान अभी भी मौजूद है।
  • इस वर्ष राज्य में धान का उत्पादन 19 मिलियन टन से अधिक होने की संभावना है।
  • FCI गोदामों में जगह की कमी के कारण पुराने स्टॉक की निकासी धीमी हो गई है।

पंजाब का कृषि क्षेत्र इस समय एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती से जूझ रहा है। केंद्र सरकार ने 2025-26 की फसल के लिए कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी की समय सीमा को बढ़ाकर 30 नवंबर, 2026 कर दिया है। हालांकि यह केवल एक प्रशासनिक विस्तार लग सकता है, लेकिन इसने मिल मालिकों के लिए एक प्रणालीगत संकट पैदा कर दिया है क्योंकि पिछले सीजन का स्टॉक अब नई फसल के समय तक खिंच गया है।

पारंपरिक रूप से, पंजाब में मिलिंग का चक्र एक निश्चित समय पर चलता था: मार्च तक 70-80% मिलिंग पूरी हो जाती थी और जून के अंत तक शेष कार्य समाप्त हो जाता था। लेकिन पिछले कुछ सीजन से यह समय सीमा सितंबर तक खिंच रही है। चूंकि अक्टूबर से धान की कटाई शुरू होने वाली है, मिलर्स को डर है कि बंपर पैदावार के कारण नई फसल को रखने के लिए उनके पास पर्याप्त जगह नहीं होगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल स्टोरेज की समस्या नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन के संतुलन का बिगड़ना है। जब भारतीय खाद्य निगम (FCI) अन्य राज्यों से मांग कम होने के कारण पुराने स्टॉक को खाली नहीं कर पाता, तो इसका दबाव निजी मिलों पर पड़ता है। इससे एक ऐसा चक्र बन गया है जहाँ मिलें बिना किसी रखरखाव ब्रेक के 24/7 चल रही हैं, जिससे परिचालन लागत बढ़ रही है और मशीनों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

"स्टोरेज के संकट को केवल तभी दूर किया जा सकता है जब केंद्र निर्यात को बढ़ावा दे और पंजाब से चावल को बाहर निकाला जाए ताकि नई फसल के लिए जगह बन सके।"

इस संकट को और अधिक गंभीर बना रही है सरकारी गोदामों में सीमित क्षमता। राइस मिलर्स एसोसिएशन, पंजाब के अध्यक्ष ज्ञान भारद्वाज के अनुसार, पिछले सीजन के लगभग 10 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी भी बाकी है। होशियारपुर और पठानकोट जैसे जिलों में, जहाँ से चावल जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश भेजा जाता है, वहां भी मांग कम होने के कारण स्टॉक जमा हो गया है।

तनाव तब और बढ़ गया जब सरकार ने 'राइस रिसाइकिलिंग' पर सख्ती शुरू की। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि पुराने और नए अनाज के मिश्रण को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाए। हालांकि, मिलर्स का तर्क है कि लंबे समय तक भंडारण से धान में नमी कम हो जाती है और वजन घट जाता है, जिससे FCI के जुर्माने से बचने के लिए उन्हें अन्य राज्यों से चावल खरीदना पड़ता है, जिसे सरकार 'रिसाइकिलिंग' कह रही है।

पैमाना पारंपरिक चक्र वर्तमान स्थिति
मिलिंग पूर्णता जून के अंत तक सितंबर/नवंबर तक विस्तार
रखरखाव समय 5-6 महीने का ब्रेक लगातार संचालन
अनुमानित उत्पादन मानक लक्ष्य 19 मिलियन+ टन (बंपर)
क्या आप जानते हैं?: पंजाब भारत के केंद्रीय खाद्य भंडार में सबसे बड़ा योगदान देने वाले राज्यों में से एक है, जिससे इसकी मिलिंग दक्षता राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: CMR डिलीवरी की समय सीमा क्यों बढ़ाई गई है?
समय सीमा इसलिए बढ़ाई गई क्योंकि अन्य राज्यों से चावल की मांग कम हुई है, जिससे पंजाब के FCI गोदामों से अनाज की निकासी धीमी हो गई है।

प्रश्न 2: पंजाब की मिलों के संदर्भ में 'राइस रिसाइकिलिंग' क्या है?
यह उस आरोप को संदर्भित करता है कि मिलर्स वजन की कमी को पूरा करने के लिए अलग-अलग बैचों के चावल को मिलाते हैं या अन्य राज्यों से चावल खरीदते हैं।