कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने खुलासा किया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण सब्जी की खेती 3 लाख एकड़ से घटकर केवल 50,000 एकड़ रह गई है।

  • तेलंगाना में सब्जी की खेती 3 लाख एकड़ से घटकर केवल 50,000 एकड़ रह गई है।
  • यूरिया और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण अन्य राज्यों ने तेलंगाना की उपज को स्वीकार करना बंद कर दिया है।
  • राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से उर्वरकों और रसायनों के उपयोग को तर्कसंगत बनाने का आग्रह किया है।
  • गुणवत्ता बहाल करने के लिए जैविक खेती और युवाओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।

10 सितंबर, 2026 को हैदराबाद में तेलंगाना विधानसभा के चौथे दिन, कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने राज्य के बागवानी क्षेत्र में एक गंभीर संकट का खुलासा किया। मंत्री ने राज्य में सब्जियों की खेती के लिए कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों और यूरिया के अंधाधुंध उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

इस रासायनिक निर्भरता का प्रभाव अब बाजार में दिखने लगा है। मंत्री के अनुसार, रसायनों के अत्यधिक अवशेषों के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए अन्य राज्यों के लोग तेलंगाना में उगाई गई सब्जियों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। बाजार के इस विश्वास की कमी ने किसानों को सब्जी की खेती से दूर कर दिया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल कृषि विफलता नहीं है, बल्कि टिकाऊ खेती के तरीकों का व्यवस्थित पतन है। खेती के रकबे में 3 लाख एकड़ से 50,000 एकड़ तक की भारी गिरावट यह दर्शाती है कि किसान अब सब्जी उत्पादन के बजाय अधिक लाभदायक या कम जोखिम वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। अल्पकालिक लाभ के लिए रसायनों का उपयोग दीर्घकालिक मृदा क्षरण का कारण बना है।

रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर संक्रमण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि तेलंगाना की कृषि अर्थव्यवस्था के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

मंत्री ने आगे बताया कि पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ न उठाने के कारण इस गिरावट में तेजी आई। इसके अलावा, केवल चुनिंदा फसलों को सब्सिडी देने से सब्जी किसानों को गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता नहीं मिल पाई।

इस स्थिति को सुधारने के लिए, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने 60:40 के व्यय साझाकरण मॉडल के तहत कई केंद्रीय योजनाओं को लागू करना शुरू किया है। सरकार का लक्ष्य उपज और गुणवत्ता में सुधार करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से युवाओं को बेहतर वित्तीय रिटर्न के लिए जैविक क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

पैमानापिछली स्थितिवर्तमान स्थिति
खेती का क्षेत्र3,00,000 एकड़50,000 एकड़
खेती का तरीकारसायन प्रधानजैविक की ओर संक्रमण
बाजार स्वीकृतिउच्च/क्षेत्रीयघटती/अस्वीकृत
क्या आप जानते हैं?: यूरिया का अत्यधिक उपयोग मिट्टी को अम्लीय बना सकता है, जिससे पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को सोखना कठिन हो जाता है, भले ही वे मिट्टी में मौजूद हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अन्य राज्य तेलंगाना की सब्जियों को क्यों नकार रहे हैं?
मुख्य कारण रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

प्रश्न 2: सरकार इस समस्या को हल करने के लिए क्या कर रही है?
राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है, साझा फंडिंग के साथ केंद्रीय योजनाओं को लागू कर रही है और युवाओं को टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।