अमेरिकी श्रम विभाग ने आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट की PERM फाइलिंग को निलंबित कर दिया है, जिससे हजारों भारतीय पेशेवरों के ग्रीन कार्ड मिलने की राह में बड़ी बाधा आ गई है। यह कार्रवाई रोजगार-आधारित आप्रवासन कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी की जांच का हिस्सा है।
- अमेरिकी श्रम विभाग ने आईटी कंपनी कॉग्निजेंट और सॉफ्टवेयर फर्म क्लाउडेरा की PERM फाइलिंग निलंबित की है।
- यह कार्रवाई रोजगार-आधारित आप्रवासन कार्यक्रमों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की जांच के कारण की गई है।
- भारतीय कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की 'प्रायोरिटी डेट' सुरक्षित करने में भारी देरी होगी।
- मौजूदा H-1B वीजा वैध रहेंगे, लेकिन 6 साल की सीमा तक पहुंचने वाले कर्मचारियों को समस्या हो सकती है।
अमेरिकी श्रम विभाग ने आईटी सेवाओं की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) की PERM (Program Electronic Review Management) फाइलिंग को निलंबित कर दिया है। PERM वह मुख्य प्रणाली है जिसका उपयोग अमेरिकी नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए प्रायोजित करने के लिए करते हैं। यह कदम रोजगार-आधारित आप्रवासन कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच के बीच उठाया गया है।
श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने 8 सितंबर को इस कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उनका कार्यालय व्हाइट हाउस फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक कॉग्निजेंट के खिलाफ विशिष्ट आरोपों या प्रभावित आवेदनों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह निलंबन भारतीय टेक पेशेवरों के लिए एक गंभीर संकट पैदा करता है। चूंकि PERM ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला और अनिवार्य चरण है, इसलिए इसका निलंबन नए आवेदकों के लिए 'प्रायोरिटी डेट' (प्राथमिकता तिथि) को फ्रीज कर देता है। भारतीय नागरिकों के लिए, जो पहले से ही EB-2 और EB-3 जैसी श्रेणियों में दशकों लंबे इंतजार (बैकलॉग) का सामना कर रहे हैं, यह देरी उनके सपनों को और पीछे धकेल सकती है।
PERM फाइलिंग का निलंबन केवल एक कॉर्पोरेट कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हजारों कुशल भारतीय प्रवासियों की दीर्घकालिक आवासीय सुरक्षा के लिए एक सीधा खतरा है।
इसे समझने के लिए H-1B वीजा और PERM प्रक्रिया के बीच अंतर जानना जरूरी है। H-1B एक अस्थायी गैर-अप्रवासी कार्य वीजा है, जबकि PERM स्थायी निवास प्राप्त करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। एक भारतीय इंजीनियर H-1B वीजा पर काम कर सकता है, जबकि कंपनी उसके लिए ग्रीन कार्ड हेतु PERM आवेदन करती है। वर्तमान में, PERM निलंबन से मौजूदा H-1B स्थिति या पहले से जारी ग्रीन कार्ड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सबसे अधिक जोखिम उन कर्मचारियों का है जो अपने H-1B वीजा की छह साल की सामान्य सीमा के करीब पहुंच रहे हैं। अमेरिकी नियमों के अनुसार, यदि समय पर लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) फाइल किया गया हो, तो वीजा की अवधि बढ़ाई जा सकती है। PERM प्रक्रिया शुरू न हो पाने के कारण इन कर्मचारियों की कानूनी स्थिति खतरे में पड़ सकती है।
कॉग्निजेंट के विशाल आकार के कारण इस कार्रवाई का प्रभाव बहुत व्यापक है। जून 2026 तक कंपनी के पास वैश्विक स्तर पर 3,56,700 कर्मचारी थे, जिनमें से 2,50,000 से अधिक भारत में स्थित थे। इसका मतलब है कि प्रभावित होने वाले अधिकांश लोग भारतीय पेशेवर होंगे।
| विशेषता | H-1B वीजा | PERM प्रक्रिया |
|---|---|---|
| प्रकृति | अस्थायी कार्य परमिट | स्थायी निवास का मार्ग |
| आवेदक | व्यक्ति (नियोक्ता के माध्यम से) | नियोक्ता (कर्मचारी की ओर से) |
| लक्ष्य | अल्पकालिक रोजगार | ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) |
| वर्तमान स्थिति | सामान्यतः अप्रभावित | कॉग्निजेंट के लिए निलंबित |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या PERM निलंबन से मेरा वर्तमान H-1B वीजा रद्द हो जाएगा?
नहीं, PERM निलंबन से मौजूदा H-1B वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड रद्द नहीं होता है।
प्रश्न 2: इस कार्रवाई से सबसे अधिक कौन प्रभावित होगा?
वे कर्मचारी जिन्होंने अभी तक PERM प्रक्रिया शुरू नहीं की है या जो अपने H-1B वीजा की 6 साल की अवधि पूरी करने वाले हैं।