मुंबई में आयोजित बैठक के बाद BRICS देशों ने व्यापार में एकतरफा टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान प्रणालियों को जोड़ने पर जोर दिया है।

  • BRICS देशों ने WTO नियमों के खिलाफ एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और टैरिफ पर चिंता जताई है।
  • स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार भुगतान (Cross-border payments) के लिए व्यावहारिक समाधानों की मांग।
  • भारत की अध्यक्षता में 'ग्रोथ एंड डेवलपमेंट' पर एक नए टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों (FMCBG) की महत्वपूर्ण बैठकें जयपुर और मुंबई में संपन्न हुईं। 11 सितंबर, 2026 को जारी एक संयुक्त बयान में, सदस्य देशों ने वैश्विक व्यापार में 'एकतरफा थोपे गए' टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इन उपायों को व्यापार में बाधा डालने वाला और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के विपरीत बताया गया है।

हालांकि संयुक्त बयान में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधा इशारा संयुक्त राज्य अमेरिका की व्यापार नीतियों की ओर है, जो वर्तमान में अपने व्यापारिक भागीदारों पर कड़े टैरिफ लगा रहा है। BRICS देशों का तर्क है कि इस तरह के दबाव का सबसे बुरा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों (EMDEs) पर पड़ता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS अब केवल एक राजनीतिक समूह नहीं, बल्कि एक आर्थिक ढाल के रूप में उभर रहा है। डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की दिशा में यह कदम वैश्विक वित्तीय वास्तुकला (Financial Architecture) को बदलने की क्षमता रखता है। यह पश्चिमी प्रभुत्व के मुकाबले एक बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था की ओर संकेत है।

"एकतरफा व्यापार प्रतिबंध न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, बल्कि यह विकासशील देशों की आर्थिक संप्रभुता पर प्रहार है।"

बैठक के दौरान BRICS पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) के कार्यों की सराहना की गई। सदस्य देशों ने ऐसे भुगतान तंत्र विकसित करने पर सहमति जताई जो तेज, कम लागत वाले और सुरक्षित हों। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाएगा और कोई 'एक-आकार-सभी-के-लिए' (one-size-fits-all) दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाएगा।

भारत ने अपनी अध्यक्षता का लाभ उठाते हुए 'BRICS टास्क फोर्स ऑन ग्रोथ एंड डेवलपमेंट' की स्थापना की है। यह प्लेटफॉर्म सदस्य देशों को उनके अपने राष्ट्रीय संदर्भों के अनुसार विकास मॉडल पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगा। इसमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता जैसे मुख्य स्तंभ शामिल हैं।

इसके अलावा, बैठक में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे बहुपक्षीय ऋण संस्थानों में सुधार, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग के वित्तीय अनुप्रयोगों जैसे भविष्यवादी विषयों पर भी गहन चर्चा हुई।

क्या आप जानते हैं?: BRICS का विस्तार अब केवल पांच मूल सदस्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनकर उभर रहा है, जो दुनिया की एक बड़ी आबादी और जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

1. BRICS देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार क्यों करना चाहते हैं?
ताकि वे अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर सकें और विनिमय दर के उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिमों को कम कर सकें।

2. भारत की अध्यक्षता में कौन सा नया टास्क फोर्स बनाया गया है?
भारत ने 'ग्रोथ एंड डेवलपमेंट टास्क फोर्स' की स्थापना की है, जो उभरते बाजारों की साझा चुनौतियों का समाधान करेगा।