ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने एकतरफा व्यापार शुल्क (टैरिफ) को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ बताया है। साथ ही, उन्होंने IMF और वर्ल्ड बैंक जैसे वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जोरदार मांग की है।

  • एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को व्यापार में बाधा और WTO नियमों के विरुद्ध बताया गया।
  • IMF और वर्ल्ड बैंक के नेतृत्व में उभरती अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की मांग।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवाद और ऋण जोखिमों पर चिंता व्यक्त की।
  • ब्रिक्स देशों ने वैश्विक शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनाने का संकल्प लिया।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर, ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) ने एक संयुक्त बयान जारी कर वैश्विक व्यापार प्रणाली में बढ़ते संरक्षणवाद पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ देशों द्वारा एकतरफा तरीके से लगाए गए टैरिफ न केवल व्यापार को विकृत करते हैं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का खुला उल्लंघन भी है।

बैठक के दौरान, सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) का वैश्विक उत्पादन और विकास में हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक वित्तीय संस्थानों के नेतृत्व में यह बदलाव नहीं दिखा है। ब्रिक्स देशों ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के नेतृत्व का चयन योग्यता-आधारित, समावेशी और पारदर्शी होना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय विविधता सुनिश्चित हो सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बयान केवल एक औपचारिक शिकायत नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देने की एक सोची-समझी रणनीति है। जब ब्रिक्स जैसे शक्तिशाली समूह वैश्विक शासन में सुधार की बात करते हैं, तो यह संकेत देता है कि दुनिया अब 'एकध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था' से हटकर 'बहुध्रुवीय व्यवस्था' की ओर बढ़ रही है।

"वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक शक्ति को मान्यता मिल सके।"

FMCBG ने चेतावनी दी कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन और मुद्रास्फीति के दबाव जैसे गंभीर जोखिम मौजूद हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं ने लचीलापन दिखाया है और वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखा है।

ब्रीटन वुड्स संस्थानों (BWI) के संदर्भ में, ब्रिक्स देशों ने कोटा पुनर्संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तर्क दिया कि कोटा और वोटिंग शेयर का आवंटन देशों की वर्तमान वैश्विक आर्थिक स्थिति के अनुरूप होना चाहिए, न कि दशकों पुराने आंकड़ों के आधार पर। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्वैच्छिक वित्तीय योगदान का उपयोग कोटा आवंटन या शासन प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

विषय वर्तमान स्थिति (BWI) ब्रिक्स की मांग
नेतृत्व चयन पारंपरिक/सीमित विविधता योग्यता-आधारित और समावेशी
वोटिंग पावर विकसित देशों का प्रभुत्व EMDEs के हिस्से में वृद्धि
व्यापार नीति एकतरफा टैरिफ का चलन WTO नियमों का पूर्ण पालन
क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स अब केवल 5 देशों का समूह नहीं रहा, बल्कि इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं, जिससे इसकी वैश्विक आर्थिक ताकत कई गुना बढ़ गई है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स देशों ने WTO के बारे में क्या कहा?
ब्रिक्स देशों ने कहा कि एकतरफा टैरिफ लगाना WTO के नियमों के खिलाफ है और इससे वैश्विक व्यापार बाधित होता है।

2. ब्रिक्स समूह IMF और वर्ल्ड बैंक में क्या बदलाव चाहता है?
वे चाहते हैं कि इन संस्थानों के नेतृत्व और वोटिंग पावर में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व उनकी वर्तमान आर्थिक ताकत के अनुसार बढ़ाया जाए।