BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक कुशल सीमा पार भुगतान तंत्र और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। भारत ने अपने UPI सिस्टम को अन्य सदस्य देशों के साथ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।
- BRICS सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'व्यावहारिक' भुगतान तंत्र की तलाश कर रहे हैं।
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से अपने भुगतान प्रणालियों (जैसे UPI) को आपस में जोड़ने का आग्रह किया है।
- अमेरिका ने डॉलर के प्रभुत्व को बचाने के लिए इस कदम पर चिंता जताई है और टैरिफ की चेतावनी दी है।
- भारत ने रुपये में व्यापार निपटान के ढांचे को मजबूत किया है, विशेष रूप से रूसी तेल आयात के लिए।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम के दौरान, सदस्य देशों ने वैश्विक व्यापार में अधिक लचीलापन और दक्षता लाने के लिए एक एकीकृत भुगतान प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों को अपनी भुगतान प्रणालियों को जोड़ना चाहिए और एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का उल्लेख किया, जो वर्तमान में लगभग 10 देशों में उपयोग किया जा रहा है।
जयपुर और मुंबई में आयोजित वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठकों के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि BRICS देश सीमा पार भुगतान के लिए ऐसे समाधान चाहते हैं जो तेज, कम लागत वाले, पारदर्शी और सुरक्षित हों। BRICS भुगतान टास्क फोर्स (BPTF) को इस दिशा में काम जारी रखने का निर्देश दिया गया है ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए एक साझा तंत्र विकसित किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल तकनीकी एकीकरण नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में विविधीकरण की एक रणनीतिक कोशिश है। जब अमेरिका रूस जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाकर डॉलर संपत्तियों को फ्रीज करता है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए 'डी-डॉलराइजेशन' (De-dollarization) की ओर देखती हैं। हालांकि, BRICS का लक्ष्य डॉलर को पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान करना है।
"स्थानीय मुद्राओं में व्यापार न केवल विनिमय दर के जोखिम को कम करता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक झटकों के प्रति सदस्य देशों को अधिक लचीला बनाता है।"
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की है। उनका मानना है कि BRICS का गठन डॉलर के प्रभुत्व को नष्ट करने के लिए किया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि डॉलर अपनी वैश्विक स्थिति खोता है, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ी हार जैसा होगा, और उन्होंने सदस्य देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
भारत की स्थिति काफी दिलचस्प है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में व्यापार निपटान के लिए एक ढांचा तैयार किया है। आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के कुल आयात का 8.14% (लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपये) रुपये में निपटाया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में छह गुना अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से रूसी तेल की खरीद से जुड़ी है।
| मुद्रा (Currency) | SWIFT वैश्विक भुगतान हिस्सा (%) | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| अमेरिकी डॉलर (USD) | 50.99% | वैश्विक मानक और आरक्षित मुद्रा |
| चीनी युआन (CNY) | 3.1% | चीन द्वारा आक्रामक प्रचारित |
| भारतीय रुपया (INR) | बढ़ रहा है | द्विपक्षीय व्यापार निपटान पर ध्यान |
Frequently Asked Questions
1. क्या BRICS डॉलर को पूरी तरह खत्म करना चाहता है?
नहीं, BRICS देशों का आधिकारिक रुख है कि वे डॉलर को बदलना नहीं चाहते, बल्कि व्यापार के लिए एक अधिक कुशल और समावेशी विकल्प बनाना चाहते हैं।
2. UPI का BRICS में क्या महत्व है?
UPI एक अत्यधिक कुशल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है। यदि इसे BRICS देशों में अपनाया जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की लागत और समय में भारी कमी आएगी।