कोचीन शिपयार्ड और यूएई स्थित ड्राईडॉक्स वर्ल्ड ने अंतरराष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा (ISRF) के संचालन और विस्तार के लिए एक ऐतिहासिक संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी भारत को वैश्विक समुद्री सेवा केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- कोचीन शिपयार्ड और ड्राईडॉक्स वर्ल्ड के बीच 50:50 का संयुक्त उद्यम समझौता।
- अंतरराष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा (ISRF) का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाएगा।
- भारत और यूएई के बीच समुद्री संबंधों को मजबूत करने और रोजगार सृजन पर जोर।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और यूएई की अग्रणी कंपनी ड्राईडॉक्स वर्ल्ड (एक डीपी वर्ल्ड कंपनी) ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कोचीन स्थित अंतरराष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा (ISRF) का संचालन करना और उसका विस्तार करना है, ताकि भारत की जहाज मरम्मत क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
इस ऐतिहासिक समझौते के साक्षी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और यूएई के उन्नत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सहायक विदेश मंत्री ओमरान शराफ अलहाशिमी बने। समझौते पर ड्राईडॉक्स वर्ल्ड के सीईओ राडो एंटोलोविक और सीएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जोस वी.जे. ने हस्ताक्षर किए। यह कदम भारत के समुद्री क्षेत्र में पहली बार इस तरह की सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का प्रतिनिधित्व करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह साझेदारी केवल बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करती है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर स्थित होने के कारण, कोचीन का विस्तार वैश्विक जहाजों को आकर्षित करेगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी और केरल में इंजीनियरिंग एवं फैब्रिकेशन के क्षेत्र में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
यह सहयोग भारत की बढ़ती shipbuilding क्षमताओं और यूएई की वैश्विक समुद्री विशेषज्ञता का एक आदर्श संगम है, जो एशिया में समुद्री व्यापार के समीकरण बदल देगा।
इस साझेदारी की नींव 'इंडिया मैरीटाइम वीक 2025' के दौरान हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) के साथ रखी गई थी। अब इस संयुक्त उद्यम के माध्यम से, दोनों कंपनियां ISRF की क्षमता को बढ़ाएंगी ताकि अधिक और बड़े जहाजों की सर्विसिंग की जा सके। ISRF में पहले से ही एक उन्नत शिप लिफ्ट सिस्टम और आधुनिक डॉकिंग सुविधाएं मौजूद हैं, जिन्हें अब वैश्विक मानकों के अनुरूप और अधिक विकसित किया जाएगा।
पूंजी संरचना की बात करें तो, दोनों साझेदार इस संयुक्त उद्यम में समान 50% हिस्सेदारी रखेंगे। शुरुआती पूंजी इक्विटी योगदान के माध्यम से जुटाई जाएगी। ड्राईडॉक्स वर्ल्ड के सीईओ राडो एंटोलोविक ने स्पष्ट किया कि वे कोचीन सुविधा से आगे बढ़कर भारत के अन्य क्षेत्रों में भी अपनी क्षमताओं का विस्तार करने की संभावना तलाश रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. इस संयुक्त उद्यम में हिस्सेदारी का अनुपात क्या है?
कोचीन शिपयार्ड और ड्राईडॉक्स वर्ल्ड दोनों की इस उद्यम में समान 50% हिस्सेदारी है।
2. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा (ISRF) का विस्तार करना और भारत को एक ग्लोबल मैरीटाइम हब बनाना है।