यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल की। 5-दिवसीय कार्य सप्ताह और प्रोत्साहन योजनाओं को लेकर विवाद गहरा गया है।
- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के नेतृत्व में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल।
- मुख्य मांगें: 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह का कार्यान्वयन और PLI योजना में संशोधन।
- मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ₹5,500 करोड़ के बैंकिंग कारोबार पर असर।
- आगामी चेतावनी: इस महीने के अंत में 3 दिवसीय और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी।
शुक्रवार को देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं, क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण लाखों ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक सामान्य रूप से कार्य करते रहे।
हड़ताल का व्यापक असर कई राज्यों में देखा गया। अकेले मध्य प्रदेश में लगभग 7,000 बैंक शाखाएं प्रभावित हुईं और करीब 42,000 कर्मचारियों ने काम रोका। अनुमान है कि इस एक दिन की हड़ताल से राज्य में लगभग ₹5,500 करोड़ के बैंकिंग व्यवसाय को नुकसान पहुँचा है।
5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग
इस विरोध का मुख्य कारण 5-दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग है। UFBU का दावा है कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने 8 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित 12वें द्विपक्षीय समझौते के तहत इसे पहले ही स्वीकार कर लिया था। प्रस्ताव के अनुसार, सोमवार से शुक्रवार तक कार्य समय में 40 मिनट की वृद्धि की जाएगी, ताकि शनिवार को अवकाश घोषित किया जा सके।
यूनियनों का तर्क है कि वे कोई नई रियायत नहीं मांग रहे हैं, बल्कि उस समझौते को लागू करने की मांग कर रहे हैं जिस पर पहले ही सहमति बन चुकी है। उनका कहना है कि डिजिटल बैंकिंग के युग में, जहाँ अधिकांश सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं, यह मांग पूरी तरह तर्कसंगत है।
PLI विवाद क्या है?
दूसरा बड़ा मुद्दा सरकार की परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना है। यूनियनों का आरोप है कि संशोधित PLI संरचना वरिष्ठ अधिकारियों (स्केल IV और ऊपर) और कनिष्ठ कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन राशि में भारी अंतर पैदा करती है। पहले यह प्रोत्साहन बैंक के समग्र प्रदर्शन से जुड़ा था, लेकिन अब इसे व्यक्तिगत प्रदर्शन से जोड़ दिया गया है।
| विशेषता | पिछली PLI समझ | विवादित PLI संरचना |
|---|---|---|
| प्रोत्साहन का आधार | बैंक का समग्र प्रदर्शन | व्यक्तिगत प्रदर्शन (स्केल IV+) |
| भुगतान का अंतर | सभी स्तरों पर समान | वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों में बड़ा अंतर |
| कर्मचारी दृष्टिकोण | न्यायसंगत | भेदभावपूर्ण |
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह गतिरोध केवल कार्य घंटों के बारे में नहीं है, बल्कि यह सरकारी मितव्ययिता और कर्मचारी कल्याण के बीच गहरे तनाव को दर्शाता है। जब सरकार उत्पादकता और प्रदर्शन-आधारित पुरस्कारों पर जोर देती है, तो कर्मचारी इसे अपनी सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति में कमी के रूप में देखते हैं। यदि यह समस्या नहीं सुलझी, तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
बैंकिंग में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की ओर बदलाव भारतीय वित्त के डिजिटल परिवर्तन का एक अनिवार्य हिस्सा है।
इन मांगों के अलावा, यूनियनें पेंशन संबंधी मुद्दों के समाधान, पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता और NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में वापस जाने का विकल्प देने की मांग भी कर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या निजी बैंक इस हड़ताल से प्रभावित हैं?
नहीं, यह हड़ताल मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तक सीमित है; निजी बैंक सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
2. क्या आगे भी हड़ताल होगी?
हाँ, UFBU ने सितंबर के अंत में 3 दिवसीय और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।