BRICS देशों ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' के माध्यम से वैश्विक व्यापार में एकतरफा टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। सदस्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में तत्काल सुधार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों की रक्षा की मांग की है।
- BRICS ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से अपनाया।
- एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को व्यापार के लिए खतरा बताया गया।
- WTO के नियमों और विशेष एवं विभेदक उपचार (S&DT) की रक्षा पर जोर।
- एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की गई।
नई दिल्ली: BRICS देशों ने शनिवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से अपनाया। इस घोषणापत्र के माध्यम से सदस्य देशों ने वैश्विक व्यापार में बढ़ते एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मानदंडों के खिलाफ हैं।
यह महत्वपूर्ण समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका द्वारा विभिन्न व्यापार प्रावधानों के तहत वैश्विक निर्यात को लक्षित करने वाले व्यापक टैरिफ लगाए जा रहे हैं। BRICS सदस्यों ने स्पष्ट किया कि व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां, चाहे वे 'पर्यावरण उद्देश्यों' के नाम पर संरक्षणवाद के रूप में हों या सीधे टैरिफ वृद्धि के रूप में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करती हैं और आर्थिक असमानता को बढ़ाती हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS का यह रुख वैश्विक व्यापारिक शक्ति संतुलन को बदलने की एक सोची-समझी रणनीति है। विकसित देशों द्वारा लगाए जा रहे 'कार्बन टैरिफ' और अमेरिका के 'द्वितीयक प्रतिबंध' (Secondary Sanctions) विकासशील देशों के विकास के अधिकार को बाधित कर रहे हैं।
एकतरफा आर्थिक प्रतिबंध न केवल व्यापार को बाधित करते हैं, बल्कि यह मानवता के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकारों पर भी प्रहार करते हैं।
घोषणापत्र में विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा की गई है। पूर्व RBI गवर्नर उर्जित आर पटेल के शोध का हवाला देते हुए, यह संकेत दिया गया कि अमेरिका 'हेजेमोनिक सैंक्शनर' (आधिपत्यवादी प्रतिबंध लगाने वाला) की भूमिका निभा रहा है, जो अन्य देशों की आर्थिक गतिविधियों को रोकने के लिए द्वितीयक प्रतिबंधों का उपयोग करता है।
WTO में सुधार की मांग
BRICS ने एक निष्पक्ष, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की वकालत की है। सदस्य देशों ने 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' (MFN) उपचार और विकासशील देशों के लिए 'विशेष और विभेदक उपचार' (S&DT) के सिद्धांतों को बनाए रखने पर जोर दिया है।
| मुद्दा | विकसित देशों का रुख | BRICS का रुख |
|---|---|---|
| टैरिफ नीति | संरक्षणवादी और एकतरफा | बहुपक्षीय और WTO आधारित |
| पर्यावरण कर | कार्बन टैरिफ का उपयोग | विकासशील देशों को रियायत की मांग |
| प्रतिबंध | आर्थिक दबाव के हथियार | मानवाधिकारों का उल्लंघन |
इसके अलावा, सदस्य देशों ने WTO की अपीलीय संस्था (Appellate Body) को तत्काल बहाल करने की मांग की है ताकि व्यापारिक विवादों का प्रभावी समाधान हो सके।
Historical Background
BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती शक्तियों को एक मंच पर लाने के लिए किया गया था। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संघर्षों के बावजूद, यह समूह वैश्विक शासन में सुधार के लिए एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है।
Frequently Asked Questions
1. BRICS ने किन उपायों की निंदा की है?
BRICS ने एकतरफा टैरिफ, गैर-टैरिफ उपायों और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा की है।
2. नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य WTO में सुधार करना और वैश्विक व्यापार में विकासशील देशों के हितों की रक्षा करना है।