गुजरात विधानसभा ने लालफीताशाही को खत्म करने, स्व-प्रमाणन को बढ़ावा देने और उद्योगों को 24/7 संचालित करने के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया है।

  • नियामक बोझ को कम करने के लिए पांच प्रमुख राज्य कानूनों में संशोधन।
  • दुकानों, प्रतिष्ठानों और चिकित्सा पेशेवरों के लिए स्व-घोषणा और स्व-प्रमाणन की शुरुआत।
  • सार्वजनिक सेवाओं के लिए तकनीक-संचालित 'ऑटो-एस्केलेशन' तंत्र का कार्यान्वयन।
  • 'विकसित गुजरात से विकसित भारत @2047' के विजन के साथ रणनीतिक तालमेल।

राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए, गुजरात विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को पारित कर दिया है। राज्य के उद्योग मंत्री जयराम गामित द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य राज्य को "विश्वास-आधारित शासन" (Trust-based Governance) मॉडल की ओर ले जाना है। पांच महत्वपूर्ण राज्य कानूनों में संशोधन करके, सरकार का लक्ष्य अनावश्यक नौकरशाही बाधाओं को समाप्त करना और नागरिकों एवं व्यवसायों के बीच भौतिक संपर्क को कम करना है।

इस विधेयक के तहत पांच प्रमुख कानूनों को लक्षित किया गया है: गुजरात मेडिकल काउंसिल एक्ट (1967), गुजरात अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम (2013), गुजरात (नागरिकों का सार्वजनिक सेवाओं का अधिकार) अधिनियम (2013), गुजरात दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम (2019), और गुजरात MSME सुविधा अधिनियम (2019)। इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से सरकार ने 12 सुधारात्मक धाराओं को एक साथ लागू किया है, जिससे विधायी प्रक्रिया सरल हो गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विधायी बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक कदम है। दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24/7 संचालित करने की अनुमति देकर और स्व-प्रमाणन के माध्यम से पंजीकरण को सरल बनाकर, गुजरात खुद को वैश्विक वाणिज्य केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। यह कदम विशेष रूप से 11वें वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से पहले भारी विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।

"अनिवार्य पूर्व अनुमोदनों से हटकर जोखिम-आधारित नियामक ढांचे की ओर बढ़ना गुजरात में 'इंस्पेक्टर राज' के अंत और डिजिटल रूप से सशक्त उद्यमिता युग की शुरुआत है।"

सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक गुजरात अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम में देखा गया है, जहां सुरक्षा मानकों को अब प्रदर्शन-उन्मुख और जोखिम-आधारित बनाया गया है। इसका मतलब है कि अनुपालन लागत अब एक समान होने के बजाय भवन के प्रकार और स्थानीय स्थितियों के आधार पर होगी। इसी तरह, बिजली और सिंचाई सहित आठ अतिरिक्त राज्य कानूनों को जोड़कर MSME ढांचे को और मजबूत किया गया है।

इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र में पेशेवर गतिशीलता बढ़ेगी। अन्य राज्यों में पंजीकृत डॉक्टर अब स्व-घोषणा के आधार पर गुजरात में पंजीकरण प्राप्त कर सकेंगे, जिससे चिकित्सा सेवाओं का विस्तार तेजी से होगा। प्रशासनिक मोर्चे पर, सार्वजनिक सेवा अधिकार अधिनियम में अब एक 'ऑटो-अपील' प्रणाली होगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि यदि कोई शिकायत निर्धारित समय में हल नहीं होती है, तो वह स्वचालित रूप से उच्च अधिकारियों तक पहुंच जाएगी।

क्षेत्र पिछली आवश्यकता नया प्रावधान (2026 बिल)
दुकान और प्रतिष्ठान कठोर अनुमोदन प्रक्रिया स्व-घोषणा और 24/7 संचालन
चिकित्सा पेशेवर लंबी राज्य पंजीकरण प्रक्रिया स्व-घोषणा के माध्यम से फास्ट-ट्रैक
सार्वजनिक सेवाएं मैनुअल फॉलो-अप ऑटो-एस्केलेशन तंत्र
अग्नि सुरक्षा एक समान अनुपालन जोखिम-आधारित और प्रदर्शन-उन्मुख
क्या आप जानते हैं?: 'विकसित गुजरात' विजन को 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ संरेखित किया गया है, जिसका मुख्य ध्यान टिकाऊ बुनियादी ढांचे और डिजिटल गवर्नेंस पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: सार्वजनिक सेवाओं के लिए 'ऑटो-एस्केलेशन' तंत्र कैसे काम करता है?
यदि कोई सरकारी सेवा या शिकायत कानूनी रूप से निर्धारित समय सीमा के भीतर हल नहीं होती है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से उस फाइल को त्वरित समाधान के लिए उच्च पदस्थ अधिकारी को भेज देता है।

प्रश्न 2: क्या नए बिल के तहत अब कोई भी दुकान 24/7 संचालित हो सकती है?
हाँ, दुकानें और प्रतिष्ठान 24/7 काम कर सकते हैं, बशर्ते वे कर्मचारियों के काम के घंटे, विश्राम अंतराल और रोजगार की शर्तों से संबंधित कानूनों का पालन करें।