BRICS देशों के बीच एक साझा मुद्रा लाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए, भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
- BRICS देशों के बीच फिलहाल कोई साझा मुद्रा (Common Currency) लाने का प्रस्ताव नहीं है।
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने से लेनदेन की लागत कम होगी और प्रक्रिया सरल होगी।
- यह कदम मौजूदा वैश्विक भुगतान प्रणाली को बदलने के बजाय उसे पूरक बनाने के लिए है।
- BRICS Payment Task Force (BPTF) भुगतान प्रणालियों की दक्षता पर काम कर रही है।
नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच एक साझा मुद्रा लाने की वैश्विक चर्चाओं के बीच, भारत ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान में ब्रिक्स देशों के बीच किसी भी प्रकार की 'कॉमन करेंसी' लाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को लेकर बहस तेज है। हालांकि, दलेला ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य सीमा पार व्यापार में लगने वाली लागत को कम करना और लेनदेन को अधिक सुगम बनाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ब्रिक्स द्वारा साझा मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्राओं पर ध्यान केंद्रित करना एक रणनीतिक और व्यावहारिक कदम है। यह सदस्य देशों को डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता से बचाते हुए अपनी आर्थिक संप्रभुता बनाए रखने की अनुमति देता है, बिना किसी बड़े वैश्विक वित्तीय व्यवधान के।
स्थानीय मुद्रा में भुगतान द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक व्यावहारिक व्यवस्था है, जो मौजूदा वैश्विक प्रणाली के पूरक के रूप में काम करेगी।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाएगा। ब्रिक्स में कोई 'एक आकार सभी के लिए उपयुक्त' (one-size-fits-all) दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता। इसके बजाय, BRICS Payment Task Force (BPTF) का काम विभिन्न भुगतान चैनलों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले लगभग आठ महीनों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में न केवल आर्थिक सहयोग, बल्कि वैश्विक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के समाधान पर भी गहन चर्चा हुई।
Frequently Asked Questions
1. क्या ब्रिक्स देश डॉलर को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं?
नहीं, वर्तमान में उद्देश्य डॉलर को खत्म करना नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार को आसान बनाकर लेनदेन की लागत कम करना है।
2. BRICS Payment Task Force का क्या काम है?
यह टास्क फोर्स सीमा पार भुगतान प्रणालियों को तेज, सस्ता, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी अध्ययन कर रही है।