अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किए गए कई बड़े जहाजों का रुख अब गुजरात के अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड की ओर हो रहा है। वैश्विक प्रतिबंधों और समुद्री ब्लॉकलेड के कारण ये जहाज अब पुनर्चक्रण (recycling) के लिए भारत के पास आ रहे हैं।
- अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित कई बड़े टैंकर अब गुजरात के अलंग में रिसाइकिल किए जा रहे हैं।
- बांग्लादेश और पाकिस्तान द्वारा प्रतिबंधित जहाजों को न लेने के कारण भारत अब मुख्य गंतव्य बन गया है।
- प्रतिबंधित संस्थाओं से जुड़े लेनदेन के लिए डिजिटल मुद्रा और अन्य वैकल्पिक वित्तीय चैनलों का उपयोग किया जा सकता है।
- भारतीय नियम मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को मानते हैं, अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच, गुजरात का अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड एक नए और जटिल व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किए गए कई विशालकाय जहाज, जो वियतनाम या ईरान जैसे देशों से जुड़े थे, अब अपने जीवन के अंतिम चरण में अलंग की तटरेखा पर पहुंच रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर, Marinera और Lileo जैसे जहाजों को अमेरिकी सरकार ने सीधे बेच दिया, जिसके बाद उन्हें पुनर्चक्रण के लिए अलंग लाया गया। यह केवल दो जहाजों की बात नहीं है; अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक हजार से अधिक जहाजों की सूची में से कई अब इसी रास्ते पर हैं। Lloyd’s List की रिपोर्ट के अनुसार, 'Double In' नामक एक विशाल गैस कैरियर, जिसे ईरानी कार्गो के कारण प्रतिबंधित किया गया था, एक शेल कंपनी के माध्यम से स्वामित्व बदलकर अलंग पहुंच चुका है।
क्यों बढ़ रहा है यह रुझान?
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट और समुद्री ब्लॉकलेड ने इन जहाजों को चलाना लगभग असंभव बना दिया है। जहाजों की उम्र के अलावा, मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने इन्हें बेकार कर दिया है। GMS के संस्थापक और सीईओ अनिल शर्मा के अनुसार, "बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे प्रमुख देश प्रतिबंधित जहाजों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, जिससे भारत इन जहाजों के पुनर्चक्रण के लिए प्रमुख वैश्विक गंतव्य बन गया है।"
प्रतिबंधित जहाजों का समुद्री सुरक्षा के लिए पानी से बाहर निकलना आवश्यक है, और पुनर्चक्रण एक जिम्मेदार समाधान हो सकता है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति भारत के लिए आर्थिक अवसर तो लाती है, लेकिन वित्तीय जोखिम भी पैदा करती है। चूंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इन जहाजों के मालिक मुख्यधारा की बैंकिंग प्रणाली से बाहर हो जाते हैं, इसलिए लेनदेन के लिए अक्सर रुपये, हांगकांग डॉलर, या डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी जैसे वैकल्पिक माध्यमों का सहारा लिया जाता है।
भारत में कानूनी ढांचा और चुनौतियां
भारत का Recycling of Ships Regulations 2026 मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय नियमों जैसे 'हांगकांग कन्वेंशन' के अनुपालन पर केंद्रित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत आधिकारिक तौर पर केवल संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंधों को मान्यता देता है, न कि अमेरिका या यूरोपीय संघ के एकतरफा प्रतिबंधों को। हालांकि, जालसाजी रोकने के लिए दस्तावेजों की कड़ी जांच की जाती है।
अलंग में जहाजों के प्रबंधन की जिम्मेदारी गुजरात मरीन बोर्ड की है। नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों को पंजीकरण प्रमाणपत्र, बीमा और खतरनाक सामग्री की सूची (IHM) जैसे मूल दस्तावेज जमा करने होते हैं। यदि कोई दस्तावेज फर्जी पाया जाता है, तो जहाज को किनारे लगाने या काटने की अनुमति नहीं दी जाती है।
Frequently Asked Questions
1. क्या भारत अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करता है?
नहीं, भारत आधिकारिक तौर पर केवल संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को मान्यता देता है।
2. प्रतिबंधित जहाज अलंग क्यों आ रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और समुद्री ब्लॉकलेड के कारण इन जहाजों का संचालन कठिन हो गया है, इसलिए इन्हें रिसाइकिल करना ही एकमात्र विकल्प बचा है।