भारत में बड़े पैमाने पर औपचारिक रोजगार की आवश्यकता के बीच, तिरुपुर का टेक्सटाइल क्लस्टर एक सफल ब्लूप्रिंट पेश करता है। यह लेख बताता है कि कैसे एक एकीकृत इकोसिस्टम लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं को काम दे सकता है।
- भारत को कृषि से विनिर्माण क्षेत्र की ओर बड़े पैमाने पर कार्यबल स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।
- कपड़ा और परिधान (T&A) क्षेत्र श्रम-गहन है और महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत है।
- तिरुपुर मॉडल दिखाता है कि कैसे एक एकीकृत इकोसिस्टम और साझा बुनियादी ढांचा निर्यात और रोजगार दोनों को बढ़ावा दे सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'विनिर्माण शक्ति' को सात प्रमुख धाराओं (सप्तधारा) में सबसे महत्वपूर्ण बताया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कौन सा विनिर्माण क्षेत्र भारत की विशाल युवा आबादी के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है? ICRIER के शोध के अनुसार, इसका उत्तर टेक्सटाइल और अपैरल (T&A) क्षेत्र में छिपा है।
वर्तमान में भारत की आर्थिक स्थिति एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल कार्यबल का 43 प्रतिशत अभी भी कृषि पर निर्भर है, जबकि विनिर्माण में यह केवल 12.1 प्रतिशत है। यदि हम कृषि से विनिर्माण की ओर मात्र 1 प्रतिशत का भी बदलाव ला सकें, तो यह लाखों लोगों के जीवन स्तर को बदल सकता है। समस्या केवल रोजगार की मात्रा की नहीं, बल्कि गुणवत्ता की भी है; अधिकांश भारतीय श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, जहाँ सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता का अभाव है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत की विकास यात्रा तब तक अधूरी है जब तक कि वह अपने युवाओं को 'तीन आर' (Reading, Writing, Arithmetic) की शिक्षा के बाद सम्मानजनक और औपचारिक नौकरियां प्रदान नहीं कर पाता। कपड़ा क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्रम-गहन है, इसमें कम समय (लगभग 60 दिन) में प्रशिक्षण दिया जा सकता है, और यह महिला श्रम बल भागीदारी को बढ़ाने में सक्षम है।
कपड़ा क्षेत्र केवल निर्यात बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत के अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने का सबसे प्रभावी जरिया है।
इस संदर्भ में, तमिलनाडु का तिरुपुर शहर एक वैश्विक मिसाल पेश करता है। तिरुपुर एक 'ऑर्गेनिकली ग्रोन' निटवियर क्लस्टर है, जिसने 2020-21 में 3.3 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 5.3 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है। यहाँ की सबसे बड़ी ताकत इसका 'इकोसिस्टम इफेक्ट' है। मात्र 20 किलोमीटर के दायरे में धागा बनाने से लेकर बुनाई, रंगाई, सिलाई और पैकेजिंग तक की सभी प्रक्रियाएं एक साथ जुड़ी हुई हैं।
तिरुपुर की सफलता का श्रेय केवल व्यक्तिगत उद्यमियों को नहीं, बल्कि तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) और सरकार के बीच समन्वय को जाता है। जब 2011 में पर्यावरण नियमों (ZLD) को लेकर संकट आया, तो इस क्लस्टर ने मिलकर 850 करोड़ रुपये से अधिक का साझा बुनियादी ढांचा विकसित किया। यह सामूहिक क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तिरुपुर का विकास दशकों की मेहनत का परिणाम है। ए. शक्तिवेल जैसे नेताओं के मार्गदर्शन में, उद्योग संघों ने बुनियादी ढांचे और साझा सुविधाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छोटे उद्यमियों को बड़े वैश्विक बाजार तक पहुंचने में मदद मिली।
Frequently Asked Questions
1. तिरुपुर मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे छोटे उद्यम एक साझा इकोसिस्टम बनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
2. भारत के कपड़ा निर्यात लक्ष्य क्या हैं?
भारत ने 2030 तक कपड़ा और परिधान निर्यात में 100 बिलियन डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।