ब्रिक्स (BRICS) देशों के आर्थिक विश्लेषण में चीन अभी भी सबसे बड़ी शक्ति बना हुआ है, लेकिन पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की विकास दर चीन की तुलना में काफी अधिक रही है।
- चीन ने ब्रिक्स की कुल आय में 72% योगदान दिया है।
- 2020-2025 के बीच भारत की GNI में 52% की वृद्धि हुई, जबकि चीन में यह 32% रही।
- चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी भारत से लगभग पांच गुना बड़ी है।
- ब्रिक्स के वैश्विक निर्यात में चीन का दबदबा 94% तक है।
हालिया आर्थिक विश्लेषणों ने ब्रिक्स (BRICS) समूह के भीतर शक्ति संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स की वैश्विक आय में हिस्सेदारी 2011 के 21.9% से बढ़कर 2025 में 28.9% हो गई है। हालांकि, इस वृद्धि का सबसे बड़ा श्रेय चीन को जाता है। विश्लेषण से पता चलता है कि यदि चीन को हटा दिया जाए, तो ब्रिक्स के अन्य सदस्यों की वैश्विक आय में हिस्सेदारी वास्तव में कम हो गई है।
चीन का वर्चस्व: आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिक्स की आय में हुई कुल वृद्धि में अकेले चीन का योगदान 72% रहा है। 2011 में ब्रिक्स की आय में चीन की हिस्सेदारी 45.6% थी, जो 2025 तक बढ़कर 60.2% हो गई है। यह स्पष्ट करता है कि ब्रिक्स समूह की आर्थिक ताकत का मुख्य केंद्र अभी भी बीजिंग ही है।
भारत की तेज रफ्तार: एक महत्वपूर्ण मोड़
भले ही चीन का आकार बहुत बड़ा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों (2020-2025) का प्रदर्शन भारत के पक्ष में रहा है। विश्व बैंक की 'एटलस पद्धति' का उपयोग करते हुए, भारत की सकल राष्ट्रीय आय (GNI) 2020 में $2.67 ट्रिलियन से बढ़कर 2025 में $4.04 ट्रिलियन हो गई है। यह 52% की प्रभावशाली वृद्धि है। इसके विपरीत, इसी अवधि में चीन की GNI में केवल 32% की वृद्धि देखी गई।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भारत ने चीन की तुलना में 20 प्रतिशत अंक अधिक विकास दर हासिल की है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत का आर्थिक आकार अभी भी चीन के बराबर नहीं पहुंचा है। चीन की GNI भारत की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है, जिसका अर्थ है कि पूर्ण डॉलर मूल्य में चीन ने अभी भी भारत से कहीं अधिक संपत्ति जोड़ी है।
भारत की विकास दर चीन को कड़ी टक्कर दे रही है, लेकिन आर्थिक पूर्णता के मामले में चीन अभी भी एक विशाल अंतर बनाए हुए है।
क्यों मायने रखता है यह बदलाव?
यह बदलाव ब्रिक्स के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का तेजी से बढ़ता हुआ आर्थिक इंजन समूह को विविधता प्रदान कर रहा है, जिससे यह केवल एक 'चीन-केंद्रित' ब्लॉक न रहकर एक अधिक संतुलित समूह बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है।
| पैरामीटर (2020-2025) | भारत (India) | चीन (China) |
|---|---|---|
| GNI वृद्धि दर (%) | ~52% | ~32% |
| GNI वृद्धि (ट्रिलियन में) | $1.37 | $4.86 |
| वैश्विक निर्यात हिस्सेदारी | मामूली वृद्धि | भारी प्रभुत्व |
हालांकि, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है। जहाँ भारत की आय तेजी से बढ़ी है, वहीं वैश्विक वस्तुओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी में सुधार काफी धीमा रहा है, जबकि चीन ने निर्यात के क्षेत्र में 94% की वृद्धि दर्ज की है।
Frequently Asked Questions
1. क्या भारत की अर्थव्यवस्था चीन से बड़ी हो गई है?
नहीं, चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी भारत से लगभग पांच गुना बड़ी है।
2. भारत ने किस क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़ा है?
भारत ने पिछले पांच वर्षों में आय वृद्धि की दर (Growth Rate) के मामले में चीन को पीछे छोड़ा है।